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    भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार का बयान

    देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) नें कल गुरुवार को कहा कि बैंक अभी और बैंकों का अधिग्रहण करने में समर्थ नहीं है। बैंक नें कहा है कि उसे पिछले अधिग्रहण से उबरने में अभी 2-3 साल लगेंगें।

    जाहिर है एसबीआई बैंक नें पिछले साल पांच साथी बैंकों का अधिग्रहण किया था और उन्हें अपने साथ विलय किया था। इसके साथ ही बैंक नें भारतीय महिला बैंक का अधिग्रहण भी किया था। इसके साथ ही एसबीआई बैंक विश्व के सबसे बड़े 50 बैंकों में शामिल हो गया था।

    इसके बाद पिछले कुछ दिनों से फिर से चर्चा चल रही थी कि एसबीआई बैंक कुछ और बैंकों का अधिग्रहण कर सकता है।

    इसके जवाब में बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार नें बताया, “हम इस समय बैंकों का अधिग्रहण करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि अभी हमें पिछले अधिग्रहण के परिणाम दिखनें में 2-3 साल लगेंगें।”

    उन्होनें कहा कि वर्तमान में एसबीआई बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है और इसके पास बैंकिंग प्रणाली का कुल 23 फीसदी है। ऐसे में यदि बैंक और अधिग्रहण करता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली में एसबीआई बैंक का एकाधिकार हो जायेगा, जो बाकी बैंकों के लिए सही नहीं है।

    हालाँकि रजनीश कुमार नें यह भी साफ़ किया कि देश के सरकारी बैंकों को अभी और अधिग्रहण करने की जरूरत है, जिससे प्रबंधन सही हो सके।

    इससे पहले हाल ही में सरकार नें घोषणा की थी, कि देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ़ बरोड़ा का विलय किया जाएगा।

    इस सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली नें एक प्रेस कांफ्रेंस करके इस बात की जानकारी दी थी। उन्होनें बताया था कि इस विलय से एक बड़ा बैंक बनेगा जिसका प्रबंधन अच्छे से किया जा सकेगा।

    इन तीनों बैंकों के विलय से जो बैंक बनेगा, उसका कुल व्यापार 14.82 ट्रिलियन रुपए का होगा, जिससे यह एसबीआई बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।

    यह बैंक वित्तीय रूप से मजबूत होगा। बैंक का एनपीए अनुपात भी बाकी बैंकों के मुकाबले काफी कम होगा।

    By पंकज सिंह चौहान

    पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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