मंगलवार, फ़रवरी 25, 2020

‘फ्री बलूचिस्तान’ समूह ने पाकिस्तान, ईरान के अत्याचारों के खिलाफ ब्रितानी संसद के बाहर किया प्रदर्शन

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

ब्रिटेन की संसद के बाहर फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट ने एक प्रदर्शन का आयोजन कर ईरान और पाकिस्तान की बलोच लोगो के खिलाफ अत्याचारों को रेखांकित किया था। बुधवार को भारी संख्या में एफबीएम के कार्यकर्ताओं बच्चे, महिलायें और अन्य बलोच नागरिकों ने समूचे ब्रिटेन में एफबीएम के प्रदर्शन में भाग लिया और बलूचिस्तान की आवाम को समर्थन का प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों ने ईरान और पाकिस्तान द्वारा आर्टिफिशियल बॉर्डर के दोनों तरफ मासूम बलोच नागरिकों के अपहरण और उनकी हत्या की आलोचना की है। बलूचिस्तान के नागरिक आज़ादी के लिए एक अरसे से संघर्ष कर रहे हैं।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि “बलोच संघर्ष के लिए आज़ादी शांतिपूर्ण, लोकतान्त्रिक, और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत है लेकिन ईरान और पाकिस्तान दो धार्मिक शैतान है जो यूएन के विशेषाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और कदर नहीं करते हैं।”

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बलूचिस्तान में मानवता के खिलाफ अपराध में दोनों देश शामिल हैं और धर्म के नाम पर अन्य राष्ट्रों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का प्रचार करते हैं। एफबीएम के प्रतिनिधियों और अन्य वक्ताओं ने ब्रिटेन, अमेरिका और शेष अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलोच नरसंहार को रोकने आग्रह किया है और ईरान व पाकिस्तान को बलूचिस्तान में अत्याचारों का कसूरवार ठहराने की मांग की है।

इससे पूर्व बलूचिस्तान प्रान्त के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अख्तर के मुताबिक 80 फीसदी पाकिस्तानी गद्दार है। उन्होंने कहा कि “अगर सभी राजनेता गद्दार है जो उन्हें वोट देता है उन्हें भी गद्दार घोषित कर देना चाहिए। इन लोगो ने हमारे संविधान का निर्माण किया है। इसका मतलब मुल्क के 80 प्रतिशत बाशिंदे गद्दार है।”

धर्म के आधार पर नया राष्ट्र बने पाकिस्तान ने इस्लाम के आधार पर बलूचिस्तान को पाकिस्तान के साथ मिलने का प्रस्ताव दिया लेकिन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ़ कॉमन के बलूच प्रतिनिधियों ने इससे इंकार कर दिया।

फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाकर कट्टर मुल्क पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को कमजोर करने के लिए अपनी साजिश को अंजाम दिया और 27 मार्च 1948 को बलूचिस्तान के पूर्वी भाग पर कब्ज़ा कर लिया था।

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