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    जेट एयरवेज संकट

    हाल ही में जेट एयरवेज द्वारा पेश की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार एतिहाद एयरवेज ने हाल ही में जेट एयरवेज में कुल 252 करोड़ रुपयों का निवेश किया है। इससे कर्ज के बोझ से डूबती जेट एयरवेज को थोडा सहारा मिलेगा।

    इस तरह एतिहाद ने जेट एयरवेज में किया निवेश :

    इकनोमिक टाइम्स के मुताबिक एतिहाद एयरवेज ने इस निवेश से इक्विटी नहीं खरीदी है बल्कि इतने मूल्य की टिकेट खरीदी हैं। अतः कुल 252 करोड़ रुपयों की टिकेट एतिहाद एयरवेज द्वारा खरीदी गयी हैं। ये टिकट्स जेट एयरवेज के प्राइम मेम्बेर्स को उनके जेट प्रिवीलेज पॉइंट के बदले दी जायेंगी।

    इसके अतिरिक्त जेट एयरवेज एयरलाइन फिलहाल एक इक्विटी जलसेक के लिए एतिहाद के साथ चर्चा में है। एयरलाइन ने जेट के प्रत्येक शेयर के लिए 150 रुपये से अधिक कीमत सहित कठोर शर्तें लगाई हैं। जेट के ऋणदाता एक साथ एक संकल्प कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं जो उन्हें जेट के ऋण के एक हिस्से को स्टॉक में परिवर्तित करने में देख सकता है। जेट ने हाल ही में अपनी शेयर पूंजी को 11 गुना बढ़ाने और कर्ज के लिए कंपनी में वरीयता शेयरों में परिवर्तित करने के प्रावधान किए।

    जेट एयरवेज को हो रहा लगातार घाटा :

    कुछ समय से जेट एयरवेज को लगातार घाटे हो रहे हैं। 31 दिसंबर, 2018 को जेट ने बैंकों के कंसोर्टियम को लोन चुकाने में चूक की थी। इसके विकास के बारे में सूत्रों ने बताया कि कम भुगतान के कारण जेट के विमान को ग्राउंडिंग के साथ, गोयल ने फंड के वैकल्पिक स्रोतों के लिए स्काउटिंग शुरू कर दी है। इसके चलते मंगलवार को जेट एयरवेज के चार विमानों को उड़ान भरने से रोक दिया गया था।

    एतिहाद एयरवेज ने अतिरिक्त निवेश के लिए रखी ये शर्तें :

    इस महीने के शुरू में अबू धाबी स्थित एतिहाद एयरवेज ने जेट एयरवेज में फण्ड डालने की कठोर शर्तें रखी थी। इसके अंतर्गत एतिहाद ने कहा था की वह तभी इस एयरलाइन में निवेश करेगा जब नरेश गोयल की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से कम होगी।

    इसके बाद नरेश गोयल ने एस बी आई को पात्र लिखा था। जेट एयरवेज के चेयरमैन द्वारा लिखे गए पत्र में वर्णित था की ये पत्र वे रेसोलुसन प्लान के तहत लिख रहे हैं। इसके साथ ही वे जेट एयरवेज में 700 करोड़ निवेश करने एवं अपने शेयर गिरवी रखने को तैयार हैं लेकिन वे ऐसा तभी करेंगे जब उनकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से ज्यादा बनी रहे। इससे साफ़ पता चलता है की हिस्सेदारी खोने के लिए नरेश गोयल राज़ी नहीं है और बाकी बचे सभी विकल्प आजमाना चाहते हैं।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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