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उन्नाव रेप केस दर्शाता है उत्तर प्रदेश प्रशासन का निकम्मापन

उन्नाव रेप केस

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नौ महीने पहले हुआ रेप का मामला प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का निकम्मापन साफ़ दिखाता है। पिछले नौ महीनें में प्रदेश की सरकार और पुलिस प्रशासन मूक बना तमाशा देखता रहा। अब मीडिया के बीच उछाले जाने और जनता के आक्रोश के बाद योगी सरकार नें अंततः मामले की जांच करने के लिए एक विशेष दल का गठन करने का आदेश दिया है।

दरअसल आज से नौ महीने पहले रेप की पीड़िता नें बीजेपी के एमएलए कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई पर रेप का आरोप लगाया था। इसके बाद आज तक इस मामले में कई मोड़ आये, लेकिन प्रशासन नें कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अब खबर सामने आई थी कि पीड़िता के पिता की अस्पताल में मौत हो गयी थी। उनकी मौत के पीछे का कारण उनकी बुरी तरह की पिटाई बताया जा रहा है। अब तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि उनकी पिटाई पुलिस ने की है या एमएलए कुलदीप सिंह के समर्थकों नें।

पुलिस नें पीड़िता के पिता को तब गिरफ्तार किया जब उसकी बेटी नें मुख्यमंत्री के आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया।

मीडिया में मामला आने के बाद पुलिस नें बताया कि उन्होनें एमएलए के भाई को गिरफ्तार किया है। अब सवाल उठता है कि पुलिस पिछले 9 महीने से क्या कर रही थी, जब पीड़िता रिपोर्ट लिखाने की कोशिश कर रही थी?

पीड़िता नें यह भी बताया कि उसे और उसके परिवार को मामले को रफा-दफा करने के लिए लगातार धमकियाँ मिल रही थी।

हर रेप मामले में फॉरेंसिक जांच होती है, जो इस मामले में नहीं हुई थी। पुलिस नें पीड़िता द्वारा कुलदीप सिंह का नाम बताये जाने को भी निरस्त कर दिया।

सरकार का निकम्मापन

पिछले साल जब योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी थी, तब उन्होनें कहा था कि प्रदेश में कानून व्यवस्था में कोई ढील नहीं होगी। उन्होनें कहा था कि हर मामले में पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि एफआईआर सबसे पहले दर्ज की जाए।

उन्नाव मामले में जब तक इस मामले को मीडिया में उछाला नहीं गया और सरकार की किरकिरी नहीं हुई, तब तक सरकार और पुलिस दोनों नें कुछ नहीं किया।

योगी आदित्यनाथ सरकार बार-बार कहती रही है, कि उन्होनें उत्तर प्रदेश में जुर्म को कम किया है, लेकिन इसके बावजूद उनके मुख्यमंत्री बनने के सिर्फ दो महीनें के भीतर उत्तर प्रदेश में 803 रेप के मामले दर्ज किये गए।

मुख्यमंत्री द्वारा महिलाओं को बचाने के लिए एंटी-रोमियो टीम बनायी गयी, जो अब तक सिर्फ सड़कों पर लड़कों और लड़कियों को परेशान करती नजर आई है।

सरकार को अब तक इस मामले में ठोस कदम उठाना चाहिए था और दोषी को ठोस से ठोस सजा देनी चाहिए थी।

इस मामले में सरकार और पुलिस की नाकामी पुरे देश में लोगों का पुलिस से भरोसा खत्म करने का काम कर रही है।

अब हालाँकि यह मामला सीबीआई के पास है और यह आशा है कि बदमाशों को जल्द सजा सुनाई जाए।