उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अमेरिका का सकारात्मक रुख

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया
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उत्तर कोरिया द्वारा अहम रॉकेट साइट लांच करने के बावजूद अमेरिका को पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण उम्मीद है। 38 नार्थ एंड द सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने इस साइट के निर्माण पर निगरानी के लिए सॅटॅलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन ने हनोई में मुलाकात की थी।

सीएनएन के मुताबिक 6 मार्च को ली गयी तस्वीरों के मुताबिक साइट पर संचालन किया जा रहा है। लॉन्चिंग पैड से क्रेन को हटा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार साइट के निर्माण और अन्य गतिविधियों से सामान्य ऑपरेशनल स्टेटस की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है।

अधिकारी के मुताबिक वांशिगटन ने पियोंगयांग से साइट के विनिर्माण के बाबत स्पष्टीकरण रिपोर्ट मांगी है। हालाँकि अमेरिका को इसकी जानकारी नहीं है कि पियोंगयांग ऐसे कदम क्यों उठा रहा है। इस रिपोर्ट के बाबत डोनाल्ड ट्रम्प से पूछने पर उन्होंने कहा कि “हम देखेंगे। हम इसके बाबत एक साल में आपको देंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि “पहले की साइट पर गतिविधियों की रिपोर्ट को सही बताना जल्दबाज़ी होगी।” मीडिया की अटकलों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प पियोंगयांग पर अधिक प्रतिबन्ध लगा सकते हैं। अमेरिकी राज्य विभाग के प्रवक्ता ने किम जोंग उन के साथ जुड़े रहकर वांशिगटन की प्रतिबद्धता को निभाने की बात को दोहराया है।

अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “हमें यकीन है कि राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल तक परमाणु निरस्त्रीकरण संभव है। हमारे समक्ष पर्याप्त समय है। हम वाकई तरक्की देखना चाहते हैं। हम जल्द ही अर्थपूर्ण और निरीक्षित परमाणु निरस्त्रीकरण चाहते हैं।” डोनाल्ड ट्रम्प का कार्यकाल जनवरी 2021 समाप्त हो रहा है।

शुक्रवार को उत्तर कोरिया के साथी चीन ने कहा कि “डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन की मुलाकात पेनिनसुला में परमाणु निरस्त्रीकरण की तरफ महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन यह मसला एक रात नहीं सुलझ सकता है। दोनों ही पक्षों को एक-दूसरे से अधिक उम्मीदें नहीं बांधनी चाहिए।”

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि “अगर उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण कार्यक्रम को नहीं करता है तो अमेरिका उन पर प्रतिबंधों को बढ़ा सकता है।” उन्होंने कहा कि “हनोई में किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई बैठक के बाद, वांशिगटन देखना चाहता है कि पियोंगयांग अपने परमाणु निरस्त्रीकरण और उससे जुड़ी गतिविधियों की प्रतिबद्धता को निभाता है या नहीं।

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