Mon. May 27th, 2024
    आनंदपाल

    आनंदपाल सिंह की पहचान यूँ तो एक कुख्यात मुज़रिम के रूप में है पर उसके अतीत से बहुत काम लोग ही वाक़िफ़ होंगे। वह राजस्थान के नागौर जिले के डीडवाना के पास स्थित छोटे से गांव सांवराद का रहने वाला था। वह राजस्थान का सबसे कुख्यात गैंगस्टर था जिसपर सरकार ने 5 लाख रूपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके एनकाउंटर के बाद से हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की आग में पूरा राजस्थान झुलस रहा है। अगर उसके परिवार वालों, वकील और लोगों की दलीलों को सुने तो उनका कहना है कि आनंदपाल आत्मसमर्पण करना चाहता था लेकिन राज्य सरकार और पुलिस ने उसे फेक एनकाउंटर में मार दिया।

    सादा था पुराना जीवन

    आनंदपाल राजपूतों के रावना समुदाय से ताल्लुक रखता था। इस समुदाय के लोग पुरातन काल में युद्ध में सैनिक होते थे। आनंदपाल अपने जीवन के शुरुआती दिनों में सादगी पसंद इंसान था। वह कॉलेज के दिनों में छात्रसंघ अध्यक्ष भी रह चुका था। वह एक प्रखर वक्त था और राजनीती और कानून का अच्छा ज्ञानी भी था। उसे अंग्रेजी साहित्य पढ़ने का शौक था और वह फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलता था। उसने बीएड की डिग्री ली थी और फिर सीमेंट के व्यवसाय में जुट गया। उसने डेरी भी खोल रखी थी जहाँ उसने 80 से ज्यादा गाय और भैंसे पाली थी।

    राजनीतिक लगाव

    आनंदपाल का राजनीती की तरफ झुकाव उसके कॉलेज के दिनों से ही था। वर्ष 1999-2000 में उसने सांवराद गांव से पंचायत सदस्य समिति का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरजीराम बुरडक के पुत्र जगनाथ बुरडक से वह लाडनू पंचायत समिति चुनाव में दो मतों से पराजित हुआ। उसने यह चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। उसी दौरान आनंदपाल पर सरकारी काम में बाधा पहुँचाने के लिए पहला पुलिस केस दर्ज किया गया। उसपर धमकी, फिरौती और हिंसा के आरोप लगे थे।

    अपराधिक इतिहास

    आनंदपाल का आपराधिक इतिहास बड़ा ही दिलचस्प रहा है। वह पहली बार अपराध जगत के संपर्क में तब आया जब वह जाट छात्रनेता जीवन राम गोदारा का मित्र बना। इन दोनों की दोस्ती लम्बे समय तक चली। आनंदपाल के राजनीतिक झुकाव को जीवन राम गोदारा का प्रभाव माना जाता है। इन दोनों की दोस्ती में दरार तब आयी जब जीवन राम गोदारा ने वर्ष 2006 में एक राजपूत जवान को मार दिया। यहीं से दोनों कट्टर दुश्मन बन गए। आनंदपाल ने उसी वर्ष दिनदहाड़े जीवन राम गोदारा की हत्या कर दी। यह उसके आपराधिक जीवन का पहला मर्डर था और इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    वर्ष 2006 में ही जाट महासभा के नेता गोपाल फोगावट की हत्या कर उसने खुद को खूंखार अपराधियों की सूची में दर्ज करा लिया। पिछले 25 सालों में आनंदपाल पर 6 हत्या समेत कुल 37 मुक़दमे दर्ज थे।

    जनसमर्थन की वजह

    किसी भी अपराधी के बड़े बनने में सियासत का बड़ा योगदान होता है। आनंदपाल के साथ भी कुछ ऐसा ही था। शुरुआती दिनों में खुद सियासी हुक्मरान बनने की कोशिश करने के बाद उसने अपराध जगत को चुना। कोई दल इसे स्वीकार नहीं करता पर सबको खबर है कि उसने कई दफा राजनीतिक शरण भी ली। तकरीबन 25 बड़े नेताओं और आला अफसरों ने कहा था कि आनंदपाल से उनकी जान को खतरा है। यूँ ही किसी से जान का खतरा होने की बात समझ नहीं आती। आनंदपाल का एनकाउंटर एक राजनीतिक साजिश भी हो सकती है और एक बार प्रेस वार्ता में उसने ऐसा खुद कहा था।

    राजपूतों का एकजुट होना और उनके समर्थन की मुख्य वजह है आनंदपाल का अपनी बिरादरी से लगाव। आनंदपाल ने अपनी बिरादरी के एक जवान की हत्या करने पर अपने सबसे अच्छे दोस्त को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बना लिया और दिनदहाड़े उसे मौत के घाट उतार दिया। इलाकाई लोगों का कहना है की आनंदपाल के होने से उन्हें हर काम में सहूलियत होती थी और अपनी सुरक्षा का यकीन रहता था। हर इंसान के नाम के पीछे उसका लोगों के हित में किया गया काम छिपा होता है और यही वजह है की ये लोग आनंदपाल को “राबिनहुड” की उपाधि दे रहे हैं।

    मौजूदा हालात

    3 हफ़्तों की असमंजस भरी स्थिति के बाद कल शाम को पुलिस ने जबरदस्ती आनंदपाल का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव सांवराद में कड़ी सुरक्षा के बीच सम्पन्न कराया। पुलिस के इस कदम से लोगों में नाराजगी है और वे अभी भी मामले की सीबीआई जाँच की मांग पर अड़े हुए है। राज्य सरकार का ये कदम आने वाले चुनावों में उसके गले की फाँस बन सकता है।

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।