Tue. Apr 16th, 2024
    ओ पन्नीरसेल्वम और ई पलानीस्वामी

    तमिलनाडु की राजनीति में मची सियासी हलचल अब शांत हो रही है। जयललिता की मौत के बाद सत्ताधारी दल एआईएडीएमके में पड़ी फूट अब समाप्त हो गई है। आज ‘एक माँ, एक पार्टी, एक परिवार’ के नारे के साथ एआईएडीएमके के दोनों धड़ों एक हो गए। इस मौके पर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और वर्तमान मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी साथ नजर आये। चेन्नई स्थित पार्टी दफ्तर से आज दोपहर दोनों नेताओं ने इस बात का ऐलान किया। पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम आज शाम 4:30 बजे तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पन्नीरसेल्वम एआईएडीएमके के संयोजक होंगे वहीं पलानीस्वामी पार्टी के सह-संयोजक की भूमिका निभाएंगे।

    विलय की घोषणा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने की। फिलहाल पार्टी दफ्तर में दोनों गुटों के समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ है और दोनों नेता समर्थकों को सम्बोधित कर रहे हैं। विलय के बाद ई पलानीस्वामी ने पन्नीरसेल्वम का शुक्रिया अदा किया और कहा कि अम्मा और एमजीआर के सपनों और उनके लक्ष्य को पूरा करने के लिए हम कटिबद्ध हैं। एक्टर कमल हासन ने इस विलय पर चुटकी लेते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि तमिलनाडु ने गांधी की टोपी देखी है, भगवा टोपी देखी है, कश्मीरी टोपी देखी है और अब मूर्ख वाली टोपी देख रहे हैं। आनंद लो, तमिलनाडु।

    इससे पूर्व शनिवार को ओ पनीरसेल्वम गुट के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री के पी मुनुस्वामी ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया था जिनमे कहा जा रहा था कि वह दोनों धड़ों को एक होने की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। उन्होंने कहा था कि पार्टी और राज्य के अच्छे के लिए शशिकला को पार्टी से निकाला जाना जरुरी है। मुनुस्वामी ने कहा कि शशिकला को पार्टी से निकाला जाना पन्नीरसेल्वम द्वारा शुरू किए गए धर्मयुद्ध की शुरुआत है। उन्होंने कहा था कि वह और गुट के अन्य सभी नेता पन्नीरसेलवम के हर फैसले का समर्थन करेंगे।

    विलय से पहले दोनों गुटों में टकराव भी देखने को मिला। पन्नीरसेल्वम का कहना था कि जब तक शशिकला को पार्टी से बाहर नहीं निकाला जाता वह पार्टी दफ्तर में नहीं आएंगे। मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने शशिकला को पार्टी से किनारे करने के नोटिस जारी करने की बात कही थी। शशिकला गुट की सरस्वती ने कहा है कि मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद चिनम्मा (शशिकला) की वजह से ही मिला है। अब एआईएडीएमके के भाजपा के साथ गठबंधन कर एनडीए में शामिल होने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी डीएमके पहले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुकी है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका बनाने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पार्टी निश्चित रूप से भाजपा के साथ जायेगी।

    जब से भाजपा ने वेंकैया नायडू को एनडीए का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया था तभी से पूरे देश की नजर दक्षिण भारत पर टिक गई थी। कुछ लोग इसे भाजपा का ‘मिशन साउथ’ कह रहे थे वहीं कुछ इसे मोदी का ‘मास्टर स्ट्रोक’ बता रहे थे। दरअसल वेंकैया नायडू की उम्मीदवारी का सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु की राजनीति पर होने वाला था।

    भाजपा पिछले काफी वक़्त से तमिलनाडु में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है और पिछले लोकसभा चुनावों में उसे कन्याकुमारी में जीत भी हाथ लगी थी। यह पहला मौका था जब भाजपा को तमिलनाडु में किसी सीट पर जीत मिली हो। ऐसे में तमिलनाडु की राजनीति में मची उठापटक भाजपा के लिए स्वर्णिम अवसर साबित हुई और वेंकैया नायडू की उम्मीदवारी ने ‘मौके पर चौका’ का काम किया। भाजपा इन दोनों धड़ों को साथ लाने की अपनी कोशिश में सफल गई है।

    भाजपा एआईडीएमके के दोनों धड़ों को साथ लाने के लिए बहुत समय से प्रयासरत था। इसलिए उसने तमिलनाडु में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को निर्देश दे रखे थे और पार्टी महासचिव मुरलीधर राव को विशेष तौर पर इस काम की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन भाजपा के लिए हर तरफ से फायदे का सौदा साबित होगा। भाजपा पिछले काफी समय से तमिलनाडु की राजनीति में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने को आतुर है। ऐसे में मौजूदा हालात उसके माकूल है। अभी तक कोई गैर द्रविड़ पृष्ठभूमि पर आधारित दल तमिलनाडु की राजनीति में अपना पाँव जमाने में सफल नहीं रहा है। ऐसे में यह भाजपा के लिए सुअवसर साबित हो सकता है।

    इस गठबंधन का भाजपा को भी फायदा होगा क्योंकि उसे दक्षिण के सबसे बड़े दल का साथ मिलेगा। एआईएडीएमके के कुल 50 सांसद है और वह इस लिहाज से भारत का तीसरा सबसे बड़ा दल है। मौजूदा समय में भाजपा और कांग्रेस ही दो ऐसे दल हैं जो सदन में संख्याबल में एआईएडीएमके से अधिक हैं। एआईडीएमके के साथ आने से राज्यसभा में अब तक कमजोर नजर आ रही भाजपा को मजबूती मिलेगी। एआईएडीएमके के भाजपा के साथ आने पर एनडीए और सशक्त हो जाएगी और अब तक कमजोर नजर आ रहा विपक्ष और कमजोर हो जाएगा। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन भाजपा के लिए फायदे का सौदा है और इससे उसकी 2019 की राह और आसान हो जाएगी।

     

     

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।