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अमेरिका और तालिबान ने शिखर सम्मेलन के रद्द होने के बाद वार्ता के द्वार खुले रखे

अमेरिका-तालिबान वार्ता

अमेरिका और अफगानिस्तान के तालिबान ने रविवार को दोबारा शुरूआती वार्ता के द्वार खुले रखे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुप्त सम्मेलन की वार्ता को रद्द कर दिया है लेकिन चरमपंथियों ने अधिक कीमत चुकाने की धमकी दी थी। वांशिगटन ने कहा कि “वह चरमपंथियों से लड़ाई में कोई तरस नहीं खायेंगे।”

तालिबान के हमले में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गयी थी, ट्रम्प ने अनिश्चित बैठक को रद्द कर दिया था। ट्रम्प ने कहा कि “उन्होंने तालिबान के नेताओं और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से रविवार को वार्ता के लिए कैंप डेविड शिविर में वार्ता के लिए आमंत्रित किया था।”

अमेरिका-तालिबान समझौता

इस समझौते के तहत अमेरिका अफगानिस्तान की सरजमीं से हजारो की संख्या में सैनिको को वापस बुलाएगा और सबसे लम्बे युद्ध को खत्म करेगा। टेलीविज़न इंटरव्यू में राज्य सचिव माइक पोम्पियो ने वार्ता पर वापस आने की अफवाह को खत्म नहीं किया था लेकिन कहा कि अमेरिका को तालिबान से एक सार्थक प्रतिबद्धता की जरुरत है।

पोम्पियो ने कहा कि “मैं निराशावादी नहीं हूँ। मैंने तालिबान को चीजे करते देखा था और कहते देखा है कि उन्हें यह करने की पहले अनुमति नहीं दी थी। मुझे उम्मीद है कि यह मामला तालिबान के व्यवहार में बदलाव लाएगा, जिसके बारे में हम महीनो से बातचीत कर रहे हैं, वह उन चीजो को दोबारा करेगा।”

उन्होंने कहा कि “आखिर में इसका समाधान सिलसिलेवार वार्ता से होगा।” उन्होंने तालिबान से अपनी इंकार को बदलने का आग्रह किया और गनी की अंतरराष्ट्रीय सरकार से वार्ता करने की गुजारिश की।

उन्होंने कहा कि “ट्रम्प ने निर्णय नहीं लिया है कि सैनिको की वापसी कब करनी है।” समझौते के तहत अगले साल अफगानिस्तान से 13000 सैनिको में से 5000 सैनिको को वापस बुला लेंगे। पोम्पियो ने चेतावनी दी कि अमेरिका तालिबान पर दबाव को कम नहीं करेगा और कहा कि तालिबान ने बीते 10 दिनों में 1000 से अधिक चरमपंथियों की हत्या की है।

दिग्गज अमेरिकी वार्ताकार ज़लमय खलीलजाद ने तालिबान के साथ वार्ता में एक साल का वक्त दिया है। तालिबान ने कहा कि ट्रम्प ने न ही अनुभव दिखाया है न ही सब्र। समूह के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि “किसी भी अन्य से ज्यादा अमेरिकियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।”

उन्होंने कहा कि “तालिबान को अभी यकीन है कि अमेरिकी पक्ष बातचीत की स्थिति में वापस आ जायेगा जो अधिग्रहण को पूरी तरह खत्म करेगा।” गनी की सरकार को तालिबान मान्यता नहीं देता है और उसे अमेरिका के हाथो की कठपुतली कहता है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति दफ्तर ने बयान में कहा कि “अगर तालिबान अफगानियो की हत्या को रोक देता , अफगान सरकार के साथ आमने सामने बातचीत करता है और संघर्षविराम को स्वीकार कर लेता है, तभी वास्तविक शान्ति को हासिल किया जा सकता है।

About the author

कविता

कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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