अर्थशास्त्र

अंतर्जात वृद्धि सिद्धांत (Endogenous Growth Theory) क्या है?

अंतर्जात वृद्धि सिद्धांत क्या है? (What is Endogenous Growth Theory in Hindi)

यह अर्थशास्त्र (Economics) का एक सिद्धांत (theory) है जोकि यह तर्क देता है कि आतंरिक प्रतिक्रियाओं (internal processes) के सीधे परिणाम के स्वरुप एक व्यवस्था आर्थिक बढ़त दर्ज कर पाता है।

यह सिद्धांत यह भी कहती है कि जब किसी भी देश के मानव पूंजी (Human Capital) में बढ़त (growth) दर्ज होती है, तो उससे नयी तकनिकी (technology) विकसित होंगे एवं दक्ष (effective) तथा प्रभावी (efficient)  उत्पादन (production) के साधन सामने उभर के आएंगे जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में और अधिक बढ़त दर्ज होगी।

इसके अंतर्गत यह कहा गया है कि मानव पूंजी, नवीनता (innovation) और ज्ञान (knowledge) में किया गया निवेश आर्थिक बढ़त के प्रमुख अभिदाता (contributor) हैं। यह सिद्धांत इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि उपयोगी बाहरी कारक (external possiblities) एवं ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था का प्लवन प्रभाव (spillover effect) भी आर्थिक विकास (development) की ओर ले जायेगा।

ये  सिद्धांत निम्नलिखित कल्पनाओं पर आधारित हैं:

  • मार्केट में कई व्यापार मौजूद हैं।
  • ज्ञान एवं तकनिकी विकास गैर प्रतिद्वंदी चीजें हैं।
  • विभिन्न लोग जो कार्य करते हैं, उससे तकनिकी विकास होता है। इसका यह मतलब भी हुआ कि नए विचारों के सृजन से तकनिकी विकास संभव है।
  • बहुत सारे लोग व्यापार एवं बाजार के नियमों से अवगत हैं और अपने खोजों के दम पर फायदा कमा सकते हैं।
  • आतंरिक कारकों में निवेश करने से भी अच्छे फायदे मिलते हैं।

अंतर्जात वृद्धि सिद्धांत की व्याख्या (Explanation of Endogenous Growth Theory in Hindi)

यह सिद्धांत नियो क्लासिकल अर्थशास्त्र के विपरित है जोकि यह तर्क देता है कि तकनिकी विकास और दूसरे बाहरी कारकों के कारण अर्थव्यवस्था का विकास होता है।

अन्तःविकसित वृद्धि सिद्धांत के अर्थशास्त्री (economists) यह मानते हैं कि मानव पूंजी में जितना ज्यादा निवेश और नवीनीकरण होगा, उत्पादन में उतनी वृद्धि होगी। इस तरह से वे सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र के संस्थानों से यह हिमायत करते हैं कि वे नए उपक्रमों (initiatives) में निवेश करेंगे और व्यक्तियों एवं व्यवसायिकों को सर्जनात्मक खोजों (creative innovation) के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

इस सिद्धांत के अंतर्गत ज्ञान पे आधारित व्यवसाय प्रमुख भूमिका निभाते हैं जैसे कि सॉफ्टवेयर, टेलीकम्युनिकेशन एवं दूसरे उच्च तकनिकी वाले व्यवसाय। ये व्यवसाय उभरते हुए एवं विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

वृद्धि सिद्धांत के कुछ प्रमुख बिंदु (Few Points of Endogenous Growth Theory in Hindi)

  • सरकारी नीतियों के द्वारा उद्यमिता को नए व्यवसाय के निर्माण के लिए बढ़ावा देना चाहिए जोकि आगे चलके नए रोजगारों को जन्म देंगे।
  • अनुसन्धान एवं विकास के क्षेत्रों में प्राइवेट संस्थानों द्वारा किये गए निवेशों के कारण तकनिकी विकास होंगे।
  • मानव पूंजी में किया गया निवेश विकास का महत्वपूर्ण कारण है।
  • व्यवसायिकों
    और उद्यमियों को अनुसन्धान एवं विकास में संलग्न करने के लिए यह जरुरी है कि उन्हें लाइसेंस एवं अधिकार दिए जाएँ।

वृद्धि विकास सिद्धांत की आलोचना (criticism of growth theory in hindi)

  • यह सिद्धांत मानव पूंजी के विकास पर कुछ ज्यादा ही प्रकाश डालता है और नए संस्थानों के भूमिका को नजरअंदाज कर देता है।
  • यह उत्पादन प्रणाली एवं स्थिर अवस्था जैसे कारकों पर कुछ ज्यादा ही निर्भर है।
  • कई अर्थशास्त्री ऐसा कहते हैं कि इस सिद्धांत के तथ्य नवशास्त्रीय सिद्धांत और दूसरे प्रारूपों पर आधारित हैं।

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यह पोस्ट आखिरी बार संसोधित किया गया July 9, 2018 12:05

गरिमा गुंजन

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गरिमा गुंजन

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