Tue. May 21st, 2024
    Earthquake in Turkey and Syria

    Turkey-Syria Earthquake: तुर्की और सीरिया में आज दिन में भूकंप के 3 बड़े झटके महसूस किए गए जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने (Richter Scale) पर 7.8, 7.6 और 6.0 मापी गई। इसके बाद तुर्की, सीरिया व आस पास के अन्य इलाकों में जबरदस्त तबाही का मंजर फैल गया।

    इन झटकों के कारण मची तबाही का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी रात 9 बजे (भारतीय समयानुसार) तक 2,300 से ज्यादा लोगों के हताहत होने की पुष्टि हो चुकी है। साथ ही तक़रीबन 10000 लोगों के घायल होने की ख़बर है। (स्त्रोत: इंडियन एक्सप्रेस)

    अभी स्थानीय पुलिस और प्रशासन के द्वारा राहत व बचाव कार्य जारी है। जैसे-जैसे मलवे हटाये जा रहे हैं, तबाही के ये आँकड़ें बढ़ते ही जा रहे हैं।

    Turkey के Gaziantep प्रांत में था भूकंप का केंद्र

    Epicenter of the Earthquake in Turkey & Syria
    (Image Source: twitter @USGS_Quakes)

    तुर्की (Turkey) के स्थानीय समयानुसार आज सुबह 4:17 पर इस भूकंप का पहला झटका महसूस किया गया जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.8 आँकी गई। इस वक़्त ज्यादातर लोग अपने घरों में गहरी नींद में रहे होंगे। तबाही के मंजर का इतना भयावह होने के पीछे यह भी एक वजह हो सकती है।

    यूनाइटेड स्टेट्स जीओलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक यह भूकंप जमीन से क़रीब 24.1 KM गहराई पर था और इसका केंद्र तुर्की-सीरिया सीमा (Turkey-Syria Border) से 90 किलोमीटर दूर तुर्की के ग़ाज़ीण्टेप (Gaziantep) प्रांत में नूरदागी (Nurdagi) नामक जगह से 23km पूर्व) में बताया जा रहा है।

    After-shocks के कारण स्थानीय लोगों में दहशत

    भूकंप का पहला सुबह 4:17 AM (स्थानीय समय) पर 7.8 तीव्रता का था और यह तकरीबन 40 सेकंड तक महसूस किया गया। ज्यादातर लोग इस वक़्त अपने घरों में गहरी नींद में रहे होंगे। लिहाजा ज़ाहिर है कि जब तक उन्हें कुछ समझ आता, चारो ओर तबाही का मंजर फैल गया था।

    इस पहले झटके को जियोलॉजी (Geology) की भाषा मे मेन-शॉक (Main Shock) कहते हैं। इसके बाद आने वाले झटकों को जो आम तौर पर रिक्टर पैमाने पर इतने शक्तिशाली नहीं होते, उन्हें आफ्टर-शॉक (After-Shocks) कहते हैं।

    तुर्की (Turkey) और सीरिया (Syria) के लोगों ने 7.8 की तीव्रता वाले Main-Shock के बाद तक़रीबन दोपहर 1:24 बजे (स्थानीय समयानुसार) 7.4 तीव्रता का एक और जबरदस्त झटका (After-Shock) महसूस किया। इस दूसरे झटके को वहां मची तबाही का सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जा रहा है।

    इसके कुछ घंटे बाद शाम को 6.0 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया। इस वजह से वहां के स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बना है कि न जाने और कितने झटके आएंगे।

    अमेरिकी संस्था USGS ने भी यह चेतावनी जारी की है कि अभी और झटके (After Shock) के आने की संभावना है। इसके मद्देनजर लोगों को सचेत रहने को कहा गया है।

    क्या Turkey में After-Shock से मची ज्यादा तबाही?

    तीव्रता के लिहाज़ से देखें तो Main-Shock जरूर शक्तिशाली लगता है और यह साधारण धारणा है कि सबसे ज्यादा तबाही भी इसी की वजह से होती है, जो अपने आप मे ठीक बात भी है। लेकिन यह हमेशा ही ठीक हो, तो ऐसा नहीं है।

    कई बार After Shocks जो Main Shock की तीव्रता से तो कम तीव्र होते हैं, पर अपेक्षाकृत फिर भी ज्यादा तीक्ष्ण हो, तो ज्यादा तबाही मचाते हैं।

    इसके पीछे का एक तर्क तो यह है कि Main Shock के कारण पहले ही इमारतें और अन्य ढांचागत संसाधन कमजोर हो चुके होते हैं, इसलिए अगर ऑफ्टर शॉक के कारण तबाही ज्यादा मचती है। दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह कि आफ्टर शॉक का केंद्र कितनी गहराई पर है और धरातल (Earth Crust) की संरचना कैसी है।

    तुर्की और सीरिया (Turkey & Syria) में आये इस भूकंप के साथ यही बातें आफ्टरशॉक को ज्यादा घातक बनाती हैं। यहाँ पहला झटका (Main Shock) की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर जहाँ 7.8 थी, वहीं दूसरे और तीसरे झटके (क्रमशः 7.4 & 6.0) भी काफ़ी शक्तिशाली थे।

    जाहिर है पहले झटके में कमज़ोर हुई इमारतें और अन्य संरचनात्मक ढांचे दूसरे और तीसरे झटके (After Shock) की तीव्रता को बर्दाश्त करने में उतने सक्षम नहीं रहे होंगे। नतीजतन यह संभावना प्रबल है कि  After Shock के कारण ज्यादा तबाही मची होगी।

    भारत ने NDRF की टीम को Turkey भेजा

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तुर्की और सीरिया में आये इस भूकंप के कारण हुई हताहत और नुकसान पर दुःख प्रकट किया और इस मौके पर भारत को तुर्की (Turkey) के साथ खड़ा बताया।

    साथ ही भारत ने NDRF की टीम को मदद और राहत व बचाव कार्य मे सहयोग हेतु रवाना भी किया है। भारत के अलावे रूस, यूनाइटेड किंगडम, आदि देशों ने भी मदद का हाँथ तुर्की और सीरियाकी तरफ़ बढ़ाया है।

    आपको बता दें, तुर्की (Turkey) में इस से पहले 1939 में इसी तीव्रता (7.8) का भूकंप आया था जिसमें 32 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

    By Saurav Sangam

    | For me, Writing is a Passion more than the Profession! | | Crazy Traveler; It Gives me a chance to interact New People, New Ideas, New Culture, New Experience and New Memories! ||सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ; | ||ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ !||

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