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    P2P फाइल शेयरिंग क्या है? (peer to peer file sharing in hindi)

    कंप्यूटर नेटवर्क में P2P यानी कि पियर तो पियर एक तकनीक है जिसके द्वारा फाइल को साझा किया जाता है।

    ये मुख्य तौर पर यूजर को मल्टीमीडिया फाइल जैसे कि विडियो, ऑडियो इत्यादि को एक्सेस करने की सुविधा प्रदान करता है।

    नेटवर्क के अंदर जितने भी यूजर होते हैं उनमे से सभी को पियर कहा जाता है। ये पियर TCP या फिर UDP कनेक्शन को स्थापित कर के उन फाइल के लिए निवेदन करते हैं।

    P2P की कार्यप्रणाली (peer to peer network model in hindi)

    पियर टू पियर  नेटवर्क बिना किसी सर्वर के कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेर को संचार करने की सुविधा देता है।

    क्लाइंट-सर्वर आर्किटेक्चर के विपरीत, P2P आर्किटेक्चर में प्रोसेसिंग निवेदन के लिए किसी भी सेंट्रल सर्वर की उपस्थिति की आवश्यकता नही होती। बिना किसी

    केंद्रीय सर्वर के वो सारे पियर एक-दूसरे से सीधा संवाद करते है।

    अब जब कोई एक पियर निवेदन भेजता है तो हो सकता है कि ऐसे एक से ज्यादा पियर हों जिनके पास वो निवेदित किया हुआ फाइल हो। अब इसमें समस्या ये होती है कि उन सारे पियर के IP एड्रेस को कहाँ स एलिया जाये।

    इसका निर्णय P2P सिस्टम के अंदर रहने वाले आर्किटेक्चर के द्वारा किया जाता है। इसमें से किसी भी एक प्रकिया द्वारा क्लाइंट पियर ये जान पता है कि किन-किन पियर के पास उसके द्वारा निवेदित किये गये फाइल हैं और फिर उनके बीच सीदा पियर टू पियर ट्रान्सफर शुरू हो जाता है।

    P2P के आर्किटेक्चर (peer to peer architecture in hindi)

    P2P के कुल तीन आर्किटेक्चर होते हैं:

    1. सेंट्रलाइज्ड डायरेक्टरी
    2. क्वेरी flooding
    3. Exploiting Heterogeneity

    अब हम इन तीनो आर्किटेक्चर को एक-एक कर समझते हैं ताकि P2P की पूरी कार्यप्रणाली और भी अच्छे से समझ आ जाए।

    1. सेंट्रलाइज्ड डायरेक्टरी (centralized directory

    • ये थोडा-थोडा क्लाइंट-सर्वर आर्किटेक्चर के समान ही होता है क्योंकि ये डायरेक्टरी सर्विस देने के लिए एक बड़ा सा सेंट्रल सर्वर का प्रबन्धन करता है।
    •  एड्रेस के बारे में सूचित करते हैं और ये भी बताते हैं कि वो कौन-कौन से फाइल को शेयर करने के लिए उपलब्ध करा रहे हैं।
    • सर्वर क्वेरी द्वारा सारे पियर से एक निश्चित अंतराल के बाद संवाद करता रहता है जिस से ये सुनिश्चित होता है कि सारे पियर कनेक्टेड हैं या नहीं।
    • इसीलिए ये कहा जा सकती है कि ये सर्वर एक बहुत ही बड़े डाटाबेस का प्रबन्धन करता है और ये बताता है कि कौन सा फाइल किस वाले IP एड्रेस में मौजूद है।

    सेंट्रलाइज्ड डायरेक्टरी की कार्यप्रणाली

    • जब भी कोई पियर निवेदन के साथ आता है तो ये सर्वर को एक क्वेरी भेजता है।
    • चूँकि सर्वर के पास सभी पियर के बारे में सारी सूचनाएँ होती है, इसीलिए ये निवेदित किया ज्ञ फाइल जहाँ-जहाँ मौजूद है उन सभी IP एड्रेस की जानकारी देता है।
    • अब दो पियर के बीच फाइल का ट्रान्सफर शुरू हो जाता है।

    वो पहला सिस्टम जिसने इस प्रक्रिया को प्रयोग में लाया उसका नाम था Napster और ये MP3 डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए किया गया था।

    ऐसे आर्किटेक्चर के साथ सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि फेलियर का एक पॉइंट होता है। अगर सर्वर ने काम करना बंद कर दिया तो पूरा का पूरा P2P नेटवर्क ही क्रेश हो जाता है। सर्वर द्वारा ही प्रोसेसिंग के सारे कार्य किये जाते हैं इसीलिए इतने बड़े डेटाबेस को मेन्टेन करने और लगातार अपडेट करना भी काफी जरूरी होता है।

    2. क्वेरी Flooding

    • अभी हमने जो देखा वो एक सेंट्रलाइज्ड तरीका था लेकिन इसमें डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम द्वारा कार्य को स्न्जाम दिया जाता है।
    • इसमे सारे पियर एक ओवरले  नेटवर्क में कनेक्टेड होते हैं यानी कि एक पियर से दूसरे तक कोई न कोई रास्ता होता है जो कि ओवरले नेटवर्क का ही भाग होता है।
    • इस ओवरले नेटवर्क में सारे पियर को नोड्स कहते हैं और उनके बीच के कनेक्शन को नोड्स के बीच के एज के नाम से जानते हैं। इसका परिणाम एक की तरह दिख रहा स्ट्रक्चर से निकलता है।

    क्वेरी Flooding की कार्यप्रणाली

    • अब जब कोई पियर किसी फाइल के लिए निवेदन करता है तो उस निवेदन को सारे पड़ोसी नोड्स के पास भेज दिया जाता है। यहाँ पड़ोसी नोड्स का अर्थ हुआ वो सारे नोड्स जो इस नोड से कनेक्टेड होते हैं। अगर उनके पास वो फाइल नहीं है तो वो सब अपने-अपने पड़ोसी नोड्स को ये निवेदन पास करते हैं और ये प्रक्रिया तब तक चलती है जबतक फाइल मिल न जाये। इसी को वुएरी flooding कहते हैं।
    • जब निवेदीन किये गये फाइल किसी पियर के पास मिल जाता है (इसे क्वेरी हिट कहा जाता है), तब क्वेरी flooding रुक जाता है और ये फाइल का नाम और आकार क्लाइंट को भेजता है जिसमे उलटे रास्ते को फॉलो किया जाता है।
    • अगर एक से ज्यादा क्वेरी हिट हो गये तो क्लाइंट को ये स्वतन्त्रता होती है कि वो उनमे से किसी एक को भी चुन सकता है।

    Gnutella पहला P2P डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क था।

    इस नेटवर्क की कुछ खामियां भी है। सबसे प्रमुख खामी यह है कि इसमें हर एक फाइल के लिए बहुत सारे नोड्स को निवेदन पास अक्रना पड़ता है जिसके कारण नेटवर्क में ट्रैफिक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

    3. Exploiting Heterogenity

    ये ऐसा P2P आर्किटेक्चर सिस्टम है जो उपर बताये गये दोनों ही आर्किटेक्चर का प्रयोग करता है। ये Gnutella की तरह ही एक decentralised सिस्टम से मिलता-जुलता है क्योंकि इसमें क्वेरी को प्रोसेस करने के लिए कोई सेंट्रल सर्वर नहीं होता। लेकिन उसकी तरह ये अपने सारे पियर को बराबर नहीं ट्रीट करता। जिस पियर की कनेक्टिविटी और बैंडविड्थ ज्यादा होती है उनकी प्रायोरिटी भी उपर होती है और उन्हें ग्रुप लीडर्स या फिर सुपर नोड्स कहा जाता है।

    बांकी के सारे पियर को इन सुपरनोड्स को असाइन कर दिया जाता है। ये सारे सुपरनोड्स आपस में कनेक्टेड होते हैं और इनके अन्दर आने वाले पियर इन्हें अपने कनेक्टिविटी, IP द्द्रेस और उपलब्ध फाइल के बारे में जानकारी देते हैं।

    KaZaA तकनीक इसका एक उदाहरण है जो कि Napster और Gnutella- दोनों का ही प्रयोग करता है। सभी ग्रुप लीडर और उनके अंदर आने वाले नोड्स Napster की तरह का स्ट्रक्चर बनाते हैं। फिर वो ग्रुप नोड्स आपस में संवाद करते हैं जो कि Gnutella की तरह होता है। इसीलिए ये दोनों ही तकनीक का प्रयोग करने वाले सिस्टम होते हैं।

    Exploiting Heterogenity की कार्यप्रणाली

    • ये स्ट्रक्चर क्वेरी को दो तरीकों से प्रोसेस कर सकता है।
    • पहला तरीका ये है कि एक सुपरनोड दूसरे सुपरनोड से कनेक्ट कर के अपने-अपने डेटाबेस को मिला सकता है और इसके बाद इस सुपरनोड के पास बहुत ज्यादा पियर की सूचनाएँ आ जाती है।
    • दूसरा तरीका ये होता है कि जब भी कोई क्वेरी आती है तो इसे पड़ोस के सुपरनोड को फॉरवर्ड कर दिया जाता है और ऐसा तब तक चलता है जब तक फाइल मिल न जाये। इसे heterogenity भी कहते हैं।

    इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

    By अनुपम कुमार सिंह

    बीआईटी मेसरा, रांची से कंप्यूटर साइंस और टेक्लॉनजी में स्नातक। गाँधी कि कर्मभूमि चम्पारण से हूँ। समसामयिकी पर कड़ी नजर और इतिहास से ख़ास लगाव। भारत के राजनितिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक इतिहास में दिलचस्पी ।

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