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    जेट एयरवेज

    सूत्रों के अनुसार जेट एयरवेज के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने बैंकों के एक संघ को जेट एयरवेज का सबसे बड़ा शेयर धारक बनने की अनुमति दे दी है जिससे की इसके संस्थापक नरेश गोयल की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से भी कम हो जायेगी।

    नरेश गोयल की हिस्सेदारी के बारे में जानकारी :

    नरेश गोयल, जिन्होंने जेट एयरवेज को 1992 में शुरू किया था, वर्तमान में उनकी इस एयरलाइन में कुल 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी है जोकि इन्हें सबसे बड़ा शेयरधारक बनाती है। हाल ही में बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा लिए गए फैसले के अंतर्गत उनकी वर्तमान की 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से भी कम हो जायेगी और एतिहाद के साथ एक बैंक मिलकर इस एयरलाइन के सबसे बड़े शेयरधारक होंगे।

    एसबीआई करेगा 8500 करोड़ का निवेश :

    इकनोमिक टाइम्स के मुताबिक सूत्रों से मिली खबर के अनुसार एसबीआई अन्य बैंकों के साथ मिलकर कर्ज में डूबी जेट एयरवेज में कुल 8500 करोड़ रुपयों का निवेश करेगा ताकि इस घाटे को ख़त्म किया जा सके। इससे एसबीआई और एतिहाद एयरवेज दुसरे बैंकों के साथ मिलकर जेट एयरवेज के सबसे बड़े शेयरधारक बन जायेंगे। जैसे ही नरेश गोयल की 20 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी होगी, वे जेट एयरवेज का नियंत्रण खो देंगे।

    इस तरह किया जाएगा निवेश :

    इस निवेश से शेयरधारक एक बैठक के बाद अधिकृत पूँजी में बढ़ावा कर देंगे। एयरलाइन ने बताया की पूँजी के लिए बैंकों को कुल 114 मिलियन शेयर इशू किये जायेंगे जिससे वे निवेश करेंगे। होने वाले निवेश से एयरलाइन का लक्ष्य अधिकृत शेयर पूंजी को बढ़ाकर 2,200 करोड़ रुपये करना है। इसमें इक्विटी पूंजी का 680 करोड़ रुपये और वरीयता शेयर पूंजी का 1,520 करोड़ रुपये शामिल होगा।  तरह निवेश की गयी पूँजी का इस्तेमाल किया जायेगा।

    एतिहाद ने राखी थी यह शर्त :

    कुछ समय पहले जब जेट एयरवेज कर्जे में डूबा हुआ था, तब इसने एतिहाद एयरवेज से निवेश की गुजारिश की थी। तब एतिहाद एयरवेज ने यह शर्त रखी थी की वे निवेश तभी करेंगे जब नरेश गोयल की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से कम की जाएगी लेकिन इस पर नरेश गोयल राजी नहीं हुए थे। इसके बाद वे और दुसरे ऋण प्रदाताओं से संपर्क कर रहे थे और आखिरकार उन्हें पूँजी मिल गयी लेकिन उन्हें अपनी हिस्सेदारी में कटौती करनी पड़ी।

    जेट एयरवेज का प्रदर्शन :

    जेट एयरवेज आज से 20 साल पहले भारत में शुरू हुआ था जब राज्य एकाधिकार ख़त्म किया था। तब से यह सस्ती फ्लाइट्स उपलब्ध करा रहा था लेकिन पिछले कुछ समय से इसे बहुत घाटा हो रहा है जिससे ना तो ये लिए गए कर्ज वापस दे पा रहा है और ना ही कर्मचारियों को वेतन अदा कर पा रहा है। इसके चलते इसने लोन की मांग की थी।

    एयरलाइन ने तिमाही के लिए 732 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में कमजोर परिचालन प्रदर्शन के कारण 186 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। अभूतपूर्व यातायात वृद्धि के बावजूद राजस्व 6,411 करोड़ रुपये रहा।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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