मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता हो सकते हैं। भाजपा सूत्रों की माने तो चौहान ने 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए प्रभावशाली जीत दर्ज कराने के लिए विधानसभा में ही रहने की इच्छा व्यक्त की है।
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद खुद शिवराज ने भी केंद्र की राजनीति में जाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था “मेरी आत्मा मध्य प्रदेश में बसती है। मैं जियूँगा यहीं और मरूँगा यहीं।”
उन्होंने कहा था “विपक्ष भी मज़बूत है, हमारे पास 109 विधायक है। मेरा काम है रचनात्मक सहयोग करते हुए राज्य की चौकीदारी करना। हम रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।”
इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत थी जिसने पार्टी को सार्वजनिक समर्थन प्राप्त करने में मदद की। उसने कहा “अब मैं मुक्त हूं। मैंने आदरणीय गवर्नर को अपना इस्तीफा दे दिया है। हार की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से मेरा है। मैंने कमल नाथ जी को बधाई दी है।”
बीजेपी के सूत्रों ने कहा कि चौहान ने पार्टी की हार के लिए ज़िम्मेदारी ली है लेकिन राज्य और केंद्रीय नेतृत्व राज्य स्तरीय पदाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा और चुनाव के दौरान असंतुष्टों की भूमिका की समीक्षा कर रहा है।
गौरतलब है कि 11 दिसंबर को आये विधानसभा चुनाव परिणाम में 15 सालों के सत्ता विरोधी लहर के बावजूद शिवराज के नेतृत्व में भाजपा ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर देते हुए 230 सदस्यीय विधानसभा में 109 सीटें हासिल कि जबकि कांग्रेस 114 सीटें हासिल कर बहुमत से दूर रह गई। हालाँकि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया।
कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया है। कमलनाथ के 17 दिसंबर को शपथ लेने की संभावना है।