हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को होंगे विधानसभा चुनाव, 18 दिसंबर को होगी मतगणना

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव
हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को होंगे विधानसभा चुनाव
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वीरभूमि कहे जाने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग की जारी प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह खबर मिली है कि हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों के लिए अधिसूचना 16 अक्टूबर को जारी की जाएगी। मतों की गिनती 18 दिसंबर को होगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के लिए फोटोयुक्त वोटर आईडी कार्ड का इस्तेमाल होगा। इस वर्ष के अंत तक गुजरात में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई है।

विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश के कुल 7,521 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। सभी मतदान केंद्र जमीनी तल (ग्राउंड फ्लोर) पर होंगे। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में सभी जगह वीवीपीएटी मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा कि आज 12 अक्टूबर, गुरूवार से ही हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता लागू हो जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में पूर्णतः वीवीपीएटी का इस्तेमाल करने वाला देश का पहला राज्य होगा। हर उम्मीदवार से चुनावी खर्च का हिसाब लिया जाएगा और हर रैली की वीडियोग्राफी होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने यह बातें कही।

हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता

अचल कुमार ज्योति ने कहा कि मतदाता वीवीपीएटी मशीन से निकली पर्ची से मिलान कर यह कर लें कि उनका वोट उसी उम्मीदवार को मिला है जिसे उन्होंने वोट दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने नामांकन के बाबत विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि हर उम्मीदवार को नामांकन के दौरान सभी कॉलम भरने होंगे। निर्देशों को ना मानने वाले उम्मीदवारों पर कार्रवाई की जाएगी और उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। चुनाव आयोग के आला अधिकारियों ने कहा कि हिमाचल सरकार द्वारा जो घोषणानें, ऐलान, उद्घाटन होने थे वो हो चुके हैं। चुनावों की घोषणा में पहले ही विलम्ब हो चुका है पर अब इसमें और देरी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में आज से आचार संहिता लागू हो गई।

चुनाव आयोग ने इस बाबत कोई घोषणा नहीं की है पर यह माना जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव एक चरण में निपटा लिए जाएंगे। इस बाबत अधिसूचना 16 अक्टूबर को जारी होगी। पिछली बार भी हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में निपटा लिए गए थे। वर्ष 2012 में चुनाव 4 नवंबर को हुए थे और नतीजों की घोषण 20 दिसंबर को हुई थी। वहीं गुजरात में विधानसभा चुनाव 2 चरणों में होने की सम्भावना है। वर्ष 2012 में भी गुजरात विधानसभा चुनाव 2 चरणों में संपन्न हुए थे। फिलहाल हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और गुजरात में भाजपा की सरकार है और दोनों ही दल अपनी साख बचने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस का चुनावी आगाज थी राहुल गाँधी की मण्डी रैली

बीते दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने मण्डी में एक बड़ी रैली कर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के चुनावी अभियान का श्री गणेश किया था। देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी के लिए राहुल गाँधी ने केंद्र की सत्ताधारी मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। राहुल गाँधी ने अपने भाषण के दौरान भाजपा शासित गुजरात को केंद्र बिंदु बनाए रखा था। राहुल गाँधी ने कहा था कि वह पिछले दिनों गुजरात गए थे और गुजरात की हकीकत से वाकिफ हुए। उन्होंने कहा था कि, “गुजरात सरकार बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं देती जबकि हिमाचल सरकार 1000 रुपए प्रति माह बेरोजगारी भत्ता देती है। देश में जहाँ भी भाजपा की सरकार है वहाँ किसान आत्महत्या कर रहे हैं। भाजपा द्वारा लगातार की जा रही किसानों की उपेक्षा से आजिज आकर किसान खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं।”

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी
मण्डी की रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी

राहुल गाँधी ने केंद्र की सत्ताधारी मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि सरकार जनता की भावनाओं के साथ जुड़ने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा था कि देश को वही चला सकता है जो देशवासियों से जुड़ सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात तो करते हैं पर जनता के मन की बात नहीं सुनते हैं। हिमाचल प्रदेश की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा था कि हिमाचल सरकार ने पिछले 5 सालों में राज्य को 4 नए मेडिकल कॉलेज दिए हैं जबकि इस दौरान गुजरात में कोई भी नया मेडिकल कॉलेज नहीं बना है। राहुल गाँधी ने हिमाचल सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि छोटा राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में 5 सालों में 70,000 लोगों को सरकारी नौकरी मिली है जबकि गुजरात में यह आंकड़ा सिर्फ 10,000 तक ही सीमित है।

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर साधा था निशाना

अपनी मण्डी रैली के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने केंद्र की सत्ताधारी मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोला था। राहुल गाँधी ने कहा था कि नोटबन्दी की वजह से आज देश की विकास दर 2 फीसदी नीचे आ गई है। राहुल गाँधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने देश की जीडीपी पर हमला बोल दिया है। जीएसटी ने छोटे व्यवसायियों और उद्योगपतियों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा था कि देश में 18 फीसदी से अधिक टैक्स नहीं होना चाहिए। चीन की सरकार हर रोज अपने देश में युवाओं को रोजगार के 50,000 नए अवसर उपलब्ध करा रही है वहीं मोदी सरकार हर रोज बमुश्किल 450 युवाओं को रोजगार मुहैया करा पा रही है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने राज्य में 13,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ भाषण देते हैं और उनके वादों की जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

मतदाताओं को लुभाने में जुटे है भाजपा-कांग्रेस

गुजरात में पिछले 2 दशकों से भाजपा की सरकार है। भाजपा के परंपरागत वोटबैंक माने जाने वाले पाटीदार समाज की नाराजगी के चलते भाजपा गुजरात में बैकफुट पर है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार गुजरात का दौरा कर रहे हैं और इस दौरान कई लोकलुभावन योजनाओं की भी घोषण हुई है। कुछ दिनों पहले ही नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की नींव रखी थी और अपने जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध के नवनिर्मित गेट का उद्घाटन किया था। इसके अतिरिक्त कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत की गई। नरेंद्र मोदी अपने हालिया गुजरात दौरे पर अपने गृह नगर वडनगर भी गए थे। वहीं अमित शाह ने नाराज पाटीदारों को मनाने के लिए सरदार पटेल की जन्मस्थली करमसद से गुजरात गौरव यात्रा की शुरुआत की।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी भी पिछले कुछ वक्त से गुजरात की राजनीती में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले एक महीने से भी कम समय में राहुल गाँधी 2 बार गुजरात का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान राहुल गाँधी ने भाजपा से नाराज चल रहे पाटीदार समाज को मनाने की भी कोशिश की और पाटीदार आन्दोलन के अगुआ हार्दिक पटेल ने उन्हें समर्थन देने की बात भी कही। सौराष्ट्र और मध्य गुजरात दौरे के दौरान राहुल गाँधी ने कांग्रेस की हिंदुत्व विरोधी छवि तोड़ने का भी प्रयास किया और मंदिर-मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की। अपने सम्बोधनों के दौरान राहुल गाँधी माथे पर त्रिपुण्ड और तिलक लगाए नजर आए। राहुल गाँधी ने बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा और गिरती अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश भी की।

गुजरात-हिमाचल में पेट्रोल-डीजल पर घटी वैट दरें

इस वर्ष के अंत तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतें बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकती थी पर इससे बचने के लिए दोनों राज्यों की सरकारों ने पहले ही वैट दरों में कटौती कर जनता को लुभाने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सन्दर्भ में सभी राज्यों से वैट दरें घटाने का आह्वान किया था। गुजरात पेट्रोल-डीजल पर वैट दरें घटाने वाला देश का पहला राज्य बना था। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाताओं को साधने के लिए राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए इस कदम का क्या असर होता है।