हिंद महासागर में मालदीव वैश्विक ताकतों के हाथों की कठपुतली नहीं बनेगा: इब्राहिम मोहम्मद सोलिह

भारत और मालदीव कर रिश्ते बीते कुछ सालों में खराब रहे हैं और अब नवनिर्वाचित सरकार के मुखिया भारत के साथ एक नई साझेदारी की शुरुआत करने चाहते हैं। इस बाबत अपनी रणनीतियों पर बात करते हुए इब्राहिम सोलिह ने कहा कि भारत के साथ शताब्दियों पुराने सांस्कृतिक और एतिहासिक रिश्तों का हम आनंद उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद था कि हमारे पारंपरिक संबंधों के मध्य बेबुनियादी तनाव बना हुआ था। मैं बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ कि अपनी पहली विदेश यात्रा पर मुझे भारत आने का मौका मिला और साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे शपथ ग्रहण समारोह में शरीक होकर, दोनो देशों के रिश्तों में एक नई जान फूंक दी थी।

उन्होंने कहा कि हम स्वास्थ्य, संस्कृति, पर्यटन और हिन्द महासागर की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यधिक मज़बूत बनायेगे।

मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा एक संप्रभु राष्ट्र है और हिन्द महासागर में हिमे हमारी भूरणनीतिक स्थिति ज्ञात है। हिन्द महासागर में शांति और स्थिरता कायम रखने की जरूरत से हम भी सचेत हैं, खासकर जब व्यापार,  आवाजाही और भूराजनीतिक तनाव उठते हैं। हम भारत के साथ सुरक्षा हित साझा करते हैं और किसी को भी अपने देश का इस्तेमाल नही करने देंगे ।

मालदीव की सरकार की भारत से उम्मीदों के बाबत इब्राहिम सोलिह ने कहा कि हमारी बिगड़ती आर्थिक स्थिति को समझने के लिए हैम भारत का शुक्रिया अदा करते हैं और भारत ने राहत पैकेज देकर तुरंत हमारी समस्या का निदान कर दिया था।

उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ अपनी एतिहासिक और सांस्कृतिक समझौतों पर आधारित पारंपरिक और करीबी दोस्ती का लुत्फ उठाने चाहते हैं। इसमे एक दूसरे के देश के लिए सम्मान हो और साथ ही हैं महासागर इलाके की सुरक्षा और रक्षा बरकरार रखना चाहते हैं।

भारत और मालदीव की रणनीतिक और रक्षात्मक साझेदारी के बाबत उन्होंने कहा कि भारत और मालदीव ने हमेशा ही इसे कायम रखा है। उन्होंने कहा हम निरंतर नौसैन्य अभ्यास, गश्त और समुन्द्र की निगरानी रखते हैं। हम सभी समान प्राथमिकताओं जैसे आतंकवाद विरोधी अभियान को समझते हैं।

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