सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने बीएसएनएल के कर्मचारियों की हड़ताल का किया समर्थन

बीएसएनएल

बुधवार को सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने कहा की वे भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा आयोजित तीन दिन की हड़ताल का समर्थ करते हैं। उलेखनीय है की यह हड़ताल 18 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगी।

क्या है हड़ताल का कारण :

भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मचारियों द्वारा आयोजित होने जा रही इस हड़ताल का मुख्या कारण बीएसएनएल द्वारा हाल ही में शुरू की गयी वीआरएस स्कीम अर्थात वोलंटरी रिटायरमेंट स्कीम लाना और रिटायरमेंट की उम्र को 58 साल करने आदि फैसलों का विरोध करना है।

दस ट्रेड यूनियनों का मिला समर्थन :

होने वाली हड़ताल में बीएसएनएल के पीड़ित कर्मचारियों को देश की दस सेंट्रल ट्रेड यूनियन का साथ मिल चूका है। जिन दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने प्रस्तावित हड़ताल में अपना समर्थन बढ़ाया, उनमें INTUC, AITUC, HMS और CITU शामिल थे।

यूनियन ने एक स्टेटमेंट दी जिसमे कहा गया था की “केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2019 को नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसमें बीएसएनएल के कर्मचारियों और अधिकारियों के चल रहे संघर्ष को पूर्ण समर्थन देने का संकल्प लिया गया। ”

बीएसएनएल ने एलटीसी और मेडिकल भत्ते में भी कटौती :

कुछ समय पहले दी गयी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य-संचालित दूरसंचार बीएसएनएल ने कर्मचारी लाभ को कम कर दिया है और मौजूदा बाजार परिदृश्य में खुद को बनाए रखने के लिए खर्च में भारी कटौती करने के विभिन्न उपाय ढूंढ रहा है। बीएसएनएल ने ऐसा पिछले साल भी किया था। पिछले साल भी बीएसएनएल ने ऐसे लाभों में कटौती करके करीब 2500 करोड़ रूपए बचाए थे।

इस साल भी इसकी समान ही कुछ योजना है। बतादें की बीएसएनएल के कुल 1.8 लाख कर्मचारी है जिससे इसका अनुमानित वार्षिक खर्च 15000 करोड़ हो जाता है। वर्तमान में कर्मचारी लाभों में कटौती करके इसने करीब 625 करोड़ रूपए बचाए हैं। बीएसएनएल ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से बीएसएनएल को लगातार घाटे हो रहे हैं जिसके चलते बीएसएनएल अपने खर्चों को कम करने की कशिश कर रहा है।

बीएसएनएल को हो रहा लगातार घाटा :

यदि हाल ही के वर्षों में देखा जाए तो बीएसएनएल सरकार का सबसे बड़ा घाटा पैदा करने वाला पीएसयू बन गया है। यदि इसके घाटों के आंकड़े के बारे में बात की जाए तो हम देख सकते है की इसने 2015-16 में कुल 4859 करोड़ रुपयों का घटा वहां किया था। इसके बाद 2016-17 में इसका घाटा थोडा कम होकर 4786 करोड़ हो गया था लेकिन साल 2017-18 में बीएसएनएल का घाटा 7992 करोड़ तक बढ़ गया जिससे यह सबसे बड़ा घाटा देने वाला पीएसयू बन गया। इसी के चलते सरकार ने इसे उपर्युक्त सुझाव दिए हैं।

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