Sun. Apr 21st, 2024
    सूडान में प्रदर्शन

    सूडान की सेना के अधिकारीयों ने शुक्रवार को दावा किया कि उन्होंने तख्तापलट कोशिश को नाकाम कर दिया है और इसमें स्मभावित भूमिका के शक में 12 लोगो को हिरासत में लिया है। ट्रांजीशनल मिलिट्री काउंसिल के प्रमुख इब्राहीम ने बताया कि “आज 12 अधिकारीयों को हिरासत में लिया गया था। उसमे से सात सेना के सदस्य है और पांच लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जबकि तीन अधिकारीयों के सहायक थे।”

    नाकाम तख्तापलट

    इब्राहीम ने संकेत दिया कि माजिदमजीद गिरफ्तारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि “मजीद नजरबंदी की जा रही है। यह कैद तख्तापलट की नाकाम कोशिश करने वालो को दी जा रही है। उन्होंने सेना को उखाड़ फेंकने की कोशिश की हैं ताकि सैन्य परिषद् और विपक्ष फ्रीडम एंड चेंज फोर्सेज के बीच समझौते को बाधित किया जा सके।”

    सूडान में टीएमसी और प्रदर्शनकारी आन्दोलन के नेता साझा साझा करने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। बीते हफ्ते टीएमसी और फ्रीडम एंड चेंज एक समझौते पर पंहुचे थे कि एक संयुक्त सैन्य-नागरिक परिषद् का गठन सूडान में किया जा सके। यह परिषद् तीन वर्षों की समयसीमा तक देश पर हुकूमत करेगी। अफ्रीकी संघ मध्यस्थ्ताकार हसान लेबट ने यह बात कही है।

    समझौते के तहत सेना और नागरिक विपक्षी हिंसा की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की पहले करने पर रजामंद हो गए हैं। इस हिंसा की शुरुआत 3 जून को हुई थी जब करीब 113 लोग लोकतंत्र समर्थन में सैन्य कार्रवाई में मारे गए थे। इस समझौते ने देश में शांतिपूर्ण हस्तांतरण की उम्मीदों को वापस जगा दिया है।

    अप्रैल में सूडान में हिंसक प्रदर्शनों के कारण काफी नुकसान हुआ था। सेना ने इस माह देश के निरंकुश शासक ओमर अल बशीर को सत्ता से उखाड़ फेंका था। जन प्रदर्शन पहले बशीर के शासन में हुआ और उसके बाद टीएमसी में और अभी तक देश में जारी है।

    संघर्ष के चरम पर दारफुर में 16000 सैनिक तैनात थे लेकिन वापसी की शुरुआत के बाद करीब 7200 सैनिक और पुलिस कर्मी मौजूद है। यूएन के मुताबिक, 300000 से अधिक लोगो की मौत हो चुकी है और 25 लाख हिंसा से विस्थापित हुए हैं।

     

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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