सूडानी नेताओं ने सेना के साथ सत्ता साझा करने के समझौते पर किये दस्तखत

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सूडान
A Sudanese protester holds a national flag as he stands on a barricade along a street, demanding that the country's Transitional Military Council hand over power to civilians, in Khartoum, Sudan June 5, 2019. REUTERS/Stringer TPX IMAGES OF THE DAY
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सूडान के मुख्य विपक्षी गठबंधन और सत्ताधारी सैन्य परिषद् ने अधिकारी तौर पर सत्ता साझा करने के समझौते पर शनिवार को हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के साथ ही सत्ता को नागरिक सरकार के सुपुर्द कर दिया जायेगा। सत्ता से बेदखल राष्ट्रपति ओमर अल बशीर के खिलाफ महीनो के प्रदर्शन के नाद नागरिक सरकार को सत्ता सौंपी गयी है।

पॉवर शेयरिंग डील एक संयुक्त सेना और नागरिक संप्रभु परिषद का गठन करेगी जो तीन सालो तक हुकूमत करेगा जाब तक चुनावो का आयोजन नहीं किया जाता है। इस समझौते के तहत एक सैन्य नेता 11 सदस्यों की परिषद् का नेतृत्व 21 महीनो तक करेगा और फिर अगले 18 महीनो तक नागरिक सरकार की हुकूमत होगी।

कार्यकर्ताओं और संसदीय संस्था एक कैबिनेट का भी गठन करेगा। इस समझौते पर हस्ताक्षर सैन्य परिषद् के उप प्रमुख मोहमद हमदान डगालो और आज़ादी व बदलाव के अम्ब्रेला समूह ने किये थे। इस दस्तखत के समारोह में राज्य के प्रमुखों, प्रधानमंत्रियों और कई देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी।

इसमें इथोपिया के प्रधानमन्त्री अबिय अहमद और दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति सलवा कीर भी शामिल है। इस समझौते से सूडान में शांतिपूर्ण हस्तांतरण की उम्मीदे बढ़ गयी है। बशीर के शासन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए थे और इसके बाद सेना ने शासन की कमान संभल ली थी।

अमेरिका के राज्य विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ओर्टागुस ने कहा कि “सैन्य परिषद् और गठबंधन के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के लिए अमेरिद्चा सूडान की जनता को बधाई देता है। नागरिको के नेतृत्व में सरकार के गठन के शुरूआती दौर से अमेरिका इसके प्रोत्साहित करता रहा है।”

अशांति सूडान दिसम्बर 2018 सूडान वापस शान्ति की पटरी पर वापस आ सकता था, जब राष्ट्रपति ओमर का तख्तापलट सेना ने किया था। महीनो के प्रदर्शन के बाद सेना ने राष्ट्रपति को पद से बर्खास्त कर दिया था और हुकूमत की बागडोर संभाली थी।

प्रदर्शनकारियों ने सेना से सत्ता की डोर को नागरिक प्रशासन को सौंपने के लिए प्रदर्शन किये थे। 3 जून को सैन्य मुख्यालय के बाहर बैठे प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए सेना ने हिंसक हमला कर दिया था।

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