सुषमा स्वराज चीन दौरा

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज,अपने चार दिवसीय चीन के दौरे पर शनिवार देर रात बीजिंग पहुंची। इस दौरे का मुख्य उद्देश पिछले कुछ दिंनों से भारत चीन सम्बन्ध में जो खटास आ गयी थी, उसे कम करना और द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर करना है।

भारत-चीन के संबंध पिछले साल 72 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। ब्रह्मपुत्र और सतलज नदियों के बारे मे चीन जो जानकारी भारत के साथ साझा करता था, उसे चीन ने बंद कर दिया था। इस साल अपने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की इच्छा दोनो देशों ने जताई थी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का चीन दौरा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के चीन यात्रा के बाद हो रहा हैं। अपने दौरे में अजित डोवाल ने चीन के विदेश मामलों की समिति के डायरेक्टर यांग जेईची और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के कुछ सदस्यों से भी मुलाकात की थी। इससे सुषमा स्वराज के दौरे की एहमियत और भी बढ़ जाती हैं।

शंघाई सहयोग संघटन (एससीओ) की विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने पहुंची सुषमा स्वराज ने, अपने समकक्ष वांग यी के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात में पारस्परिक हितों के विषय, व्यापार, दहशतवाद,जलवायु परिवर्तन, हेल्थकेयर जैसे विषयों पर दोनों ने चर्चा की। संगठन की रक्षा मंत्री स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी हिस्सा लेंगी।

अपने चीनी समकक्ष और स्टेट काउंसलर वांग यी से मुलाकात के बाद अपने साझा बयान में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित ‘अनौपचारिक बैठक’ की सूचना दी और इस मुलाकात से दोनों पड़ोसियों के संबंध सुधारने की आशंका जताई।

आपको बता दे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस अनौपचारिक बैठक में हिस्सा लेने 27-28 अप्रैल को चीन जाएँगे। यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा से डेढ़ महीने पहले हो रही हैं। इससे पहले वे शंघाई सहयोग संघटन की सालाना शिखर वार्ता में हिस्सा लेने जून में चीन जाने वाले थें।

शंघाई सहयोग संघटन(एस.सी.ओ)की विदेश मंत्री स्तरीय बैठक से पहले सुषमा स्वराज ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उप राष्ट्रपति वांग क्वीइशान से भी मुलाकात की।

शंघाई सहयोग संघटन(एस.सी.ओ)की विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में अपने भाषण में उन्होंने बढ़ते आतंकवाद,संरक्षणवाद की कड़े शब्दों में निंदा की| इस बैठक में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद थे।

आतंकवाद के बारे में उन्होंने कहा, “आज विश्व कई चुनोतियों से जूझ रहा हैं, वैश्विक आतंकवाद पुरे विश्व के आगे एक गंभीर प्रश्न के रूप में उभर रहा हैं। इससे लढ़ने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने की जरुरत हैं।”

संरक्षणवाद को हर रूप में ख़ारिज किए जाने की वकालत करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “संरक्षणवाद को हर रूप में ख़ारिज किया जाना चाहिए और व्यापार संबंधीत बाधांओं को दूर करने के लिए अनुशासनात्मक कदम उठाने के प्रयास किये जाने चाहिए।”

बैठक में बोलते हुए सुषमा स्वराज ने कहा जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत चिंतित हैं और इसे कम करने के सतत प्रयास में हैं। भारत पेरिस जलवायु संधी २०१५ को लेकर कटिबद्ध हैं इसकी जानकरी स्वराज ने सदस्य देशों को दी।

भारत ने काबुल-कंदहार-नयी दिल्ली-मुंबई के बीच हवाई मालवाह कोरिडोर को कार्यान्वित किया हैं। भारत और अफगानिस्तान के संबंधो के बारेमे सुषमा स्वराज ने कहा, “अफगानिस्तान में शांति और समृद्धि की बहाली पूरे प्रांत के लिए महत्वपूर्ण हैं,और इसे सिर्फ मुक्त वातावरण में की गयी  बातचीत के जरिये सुलझाया जा सकता हैं।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति में बदलावों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र में बदलाव तब तक अधुरा हैं, जब तक सुरक्षा समिति में बदलाब नहीं किये जाते। भारत इस बदलाव का पक्षधर हैं।”

“आज आप सभी जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति पुरे विश्व का प्रतिनिधित्व नहीं करती और आज विश्व में जो परिस्थितियां हैं उनपर निर्णय लेने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति में आम सहमती नहीं बन पाती और उससे से समिति के कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।”

विदेश मंत्री का चीन दौरा दोनों पड़ोसियों के बीच का तनाव कम करने में कारगर साबित हुआ हैं। उम्मीद हैं आने वाले दिनों में भारत-चीन के रिश्ते अच्छे होंगे जिससे दोनों देशों के विकास में मदद हो सके।

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