करीब 330000 शरणार्थी अपने घर सीरिया वापस लौटे: तुर्की

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

तुर्की के आंतरिक मंत्री सुलेमान सोयलू ने बताया कि “उत्तरी सीरिया में आतंक विरोधी अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद उनके मुल्क से करीब 330000 सीरिया के नागरिक वापस लौट गए थे। 329000 लोग सीरिया को वापस चले गए हैं। आफरीन और अन्य क्षेत्रों में शान्ति की स्थापना के लिए शुक्रिया।”

तुर्की में मौजूदा समय में करीब 40 लाख सीरिया के शरणार्थी है, जो विश्व में किसी भी देश से सबसे ज्यादा है। साल 2016 से तुर्की ने आतंकी रोधी अभियानों से क्षेत्रों में शान्ति और स्थिरता की स्थापना की है और इससे शरणार्थी अब अपने मुल्क को वापस लौट रहे हैं।

आंतरिक मंत्री ने कहा कि “41000 से अधिक अफगान प्रवासी इस वर्ष गैरकानूनी तरिके में तुर्की में प्रवेश हुए थे और उनमे से आधे यानी करीब 20500 लोगो का प्रत्यर्पण कर दिया गया था।”

यूनिवर्सिटी के चांसलर ने कहा कि “तुर्की के सैन्य अभियान में उत्तरी सीरिया को आतंकियों से मुक्त कर दिया है। तुर्की के सीमा क्षेत्र स्थापित एक यूनिवर्सिटी ने शांतिपूर्ण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रस्ताव दिया है।” ग़ाज़ीअंटेप यूनिवर्सिटी के कुलपति अली गुर ने कहा कि “वहां के स्थानीय सदनों और प्रांतीय नेताओं की बेहद मांगे हैं। मैं खुद उत्तरी सीरिया के भ्रमण के लिए गया था और उनकी मांगो को देख था, उन्हें वाकई जरुरत है।”

स्थानीय सीरिया के नागरिकों को तुर्की के वोकेशनल स्कूल में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मुहैया की गयी थी, जिसे बीते वर्ष अलेप्पो के जराबुलुस में गया था। इस यूनिवर्सिटी ने तुर्की के शिक्षा अधिकारीयों के समक्ष सीरिया के अल बाब और मारे जिले में शिक्षा केन्द्रो को स्थापित करने के लिए आवेदन किया है।

गुर के मुताबिक, सीरिया में इस केन्द्रो का मुख्य ध्यान अर्थशास्त्र, शिक्षा, इंजीनियरिंग और करीब 2700 छात्रों से निपुणता की परीक्षा भी ली जा चुकी है। उन्होंने कहा कि “सीरिया के जो नागरिक शिक्षा के लिए वापस आएँगे और सीरिया में बतौर छात्र रहेंगे, वह छत्रवृत्ति के लिए योग्य होंगे। हमारा मकसद छात्रों को वहां वापस भेजना है।”

सीरिया में विध्वंशक संघर्ष की शुरुआत साल 2011 के शुरुआत दौर में हुई थी। इस दौरान राष्ट्रपति असद ने प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह कुचला था। इस संघर्ष में हज़ारो नागरिक या तो मर गए या विस्थापित हो गए। इसमें से अधिकतर लोग क्षेत्रों में सरकार के हवाई हमलो से देश छोड़कर भाग गए थे।

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