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सीपीएसई के वेतन संशोधन को मंजूरी, 15वें वित्त आयोग की स्थापना

अरुण जेटली
कैबिनेट ने बुधवार को कैबिनेट ने बुधवार को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए वेतन संशोधन को मंजूरी दी।

कैबिनेट ने बुधवार को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए वेतन संशोधन को मंजूरी दी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि प्रत्येक सीपीएसई को वेतन संशोधन के लिए बातचीत करने का अधिकार है।  मंत्रिमंडल ने यह भी कहा है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा किया जाने वाला वेतन संशोधन हालिया पे स्केल से अधिक नहीं होना चाहिए। मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग की स्थापना को भी मंजूरी दे दी है।

जेटली ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की शर्तों को एक समय सीमा के अंदर अधिसूचित किया जाएगा। आपको बता दें कि वर्तमान में 9.35 लाख यूनियन कर्मचारी 320 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में कार्यरत हैं। गौरतलब है कि पीएम मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मजदूरों के लिए वेतन नीति पर फैसला लिया गया था।

कैबिनेट में बैंकों के दिवालियापन और इससे जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर भी चर्चा की गई। हांलाकि जेटली ने इन परिवर्तनों को लेकर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। संघीय कामगारों के संबंध में मजदूरी संशोधन को लेकर की जाने वाली वार्ता ट्रेड यूनियनों और सीपीएसई के प्रबंधन के द्वारा तय की जाएगी जिसे सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) निर्देशित करेगा।

एक आधिकारिक बयान में यह कहा गया है कि मजदूरी संशोधन में यह शर्त नीहित होगी कि शारीरिक श्रम लागत में कोई वृद्धि नहीं होगी। कुछ मामलों को छोड़कर प्रशासनिक मंत्रालय/ विभाग सार्वजनिक उद्यम विभाग उद्योग मानदंडों के अनुसार सीपीएसई पहले ही अधिकतम क्षमता पर काम कर रहे हैं।

​बैठक में य​ह निर्णय लिया गया है कि केवल वही सीपीएसई प्रबंधन मजदूरी संशोधन को स्वतंत्र होंगे, जिनका वेतन संशोधन कार्यकाल 31 दिसबंर 2016 अमान्य हो चुका था। मजदूरी में बृद्धि के लिए सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का बजटीय सहायदा नहीं दी जाएगी। संपूर्ण वित्तीय खर्च सीपीएसई द्वारा ही वहन किया जाएगा।

कैबिनेट की ओर से दिए गया बयान के अनुसार सरकार ने सीपीइएसई के पुनर्गठन या पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दे दी है। लेकिन वेतन संशोधन केवल स्वीकृत प्रावधानों के अनुसार ही करना होगा।

यही नहीं सीपीएसई को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वार्ता के बाद वेतन और माल तथा सेवाओं में किसी भी प्रकार की बृद्धि नहीं की जाएगी। साथ ही सीपीएसई प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वेतन संशोधन के बाद निर्धारित किया वेतनमान सीपीएसई से संबंधित अधिकारियों/गैर-संघीय पर्यवेक्षकों से अधिक नहीं हो।




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