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सरकार ने बीमा कंपनियों पर लोकसभा में विधेयक पेश किया; विपक्ष ने लगाया निजीकरण का आरोप

विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध के बीच शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही फिर से बाधित हो गई। केंद्र सरकार ने इसी हंगामे के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) विधेयक और सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक पेश किया। हालाँकि, कोविड-19 स्थिति पर एक निर्धारित चर्चा नहीं हो सकी।

सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई थी जब कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी मानसून सत्र के पहले दिन से पेगासस स्नूपिंग मामले, कोरोना वायरस, महंगाई और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि, “हम सदन में चर्चा चाहते हैं लेकिन सरकार को अपना रुख बदलना चाहिए।”

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अधीर रंजन चौधरी प्रश्नकाल के बाद मामले को उठा सकते हैं। इस दौरान कई विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बाद में विरोध करने वाले सदस्यों से अपील करने के लिए हस्तक्षेप किया। यह कहते हुए कि आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही दोनों सदनों में पेगासस मामले पर एक विस्तृत बयान दे चुके हैं उन्होंने कहा कि वे (विपक्ष) एक गैर-मुद्दा उठा रहे थे, जिस पर संसद पिछले सात या आठ दिनों से ठीक से काम नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि सरकार बिना चर्चा के कोई विधेयक पारित नहीं करना चाहती।

उन्होंने कहा कि, “सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन दुर्भाग्य से, वे [विपक्षी सदस्य] संसद को चलने नहीं दे रहे हैं। प्रश्नकाल सदस्यों का अधिकार है। 350 से अधिक सदस्य चाहते हैं कि प्रश्नकाल चले। इसके बावजूद अगर वे इस तरह का व्यवहार करते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है…”

हालांकि, जैसे कि नारेबाजी जारी रही तो सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) विधेयक और सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक पेश करने के लिए सदन की अनुमति मांगी।

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने बीमा विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इससे सामान्य बीमा कंपनियों का पूर्ण निजीकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि विधेयक अस्पष्ट, अनिश्चित, अस्पष्ट है और मूल अधिनियम के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से विधेयक को वापस लेने और इसे स्थगित करने का आग्रह किया क्योंकि यह सदन क्रम में नहीं था। कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश और संतोख सिंह चौधरी ने भी बीमा विधेयक पेश करने का विरोध किया।

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आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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