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“सचिन पायलट के ‘निकम्मा’ होने के बावजूद उन्हें पार्टी में सहन किया”: अशोक गहलोत

ashok gehlot and sachin pilot

राजस्थान की राजनीति में उठापठक जारी है और इसी के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के जुबानी हमले और तीखे हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने कल मीडिया से बातचीत में उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) को ‘निकम्मा’ और ‘नाकारा’ कहा। उन्होनें कहा कि सचिन पायलट का सरकार में कोई योगदान नहीं था और इसके बावजूद उन्हें कभी पार्टी से नहीं निकाला।

जब अशोक गहलोत से पूछा गया कि हाई कोर्ट के बाद क्या वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, तो उन्होनें कहा, “ये नौबत ही क्यों आई कि हमारे अपने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पायलट साहब जो 7 साल तक रहे, 7 साल तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष रखना बड़ी बात होती है। राहुल गांधी जी का सोनिया गांधी जी का कितना विश्वास उनके ऊपर था, जिस रूप में उन्होंने पिछले 6 महीने से कांस्पीरेसी की जिस रूप में, पार्टी को कैसे अलग होकर भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से, या तो जॉइन करें या टॉपल करें सरकार को, थर्ड फ्रंट बना लेंगे, जब हमारे विधायकों ने कहा हम भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाएंगे तो कहा गया कि हम थर्ड फ्रंट बनाते हैं, आप इस्तीफा देंगे आपके सामने कोई खड़ा नहीं होगा बीजेपी का ये हमने वादा ले लिया उनसे और गठबंधन गवर्नमेंट बनेगी, बिहार की तरह हम कर लेंगे।”

उन्होनें आगे कहा, “किसी को यकीन नहीं होता था जब मैं बात करता था कि कॉन्सिपरेसी चल रही है राजस्थान के अंदर सरकार को टॉपल करने की, तो किसी ये यकीन नहीं होता था कि ये व्यक्ति ये काम कर सकता है, मासूम चेहरा, हिंदी-इंग्लिश पर अच्छी कमांड बोलने की, मीडिया को इंप्रेस कर रखा है पूरे कंट्री के अंदर और जैसे कि मैंने बहुत मेहनत की है और कांग्रेस का राज लेकर आ गए राजस्थान के अंदर, वो तो राजस्थान की जनता जानती है कि कितना कॉन्ट्रिब्यूशन उनका था, हमने फिर भी कभी क्वेश्चन नहीं किया उनके ऊपर कि आप कितनी रगड़ाई करवा रहे हो, कितना काम कर रहे हो हमने क्वेश्चन नहीं किया पार्टी के इंटरेस्ट के अंदर। हम जानते थे यहां क्या हो रहा था, कुछ नहीं हो रहा था, क्वेश्चन नहीं किया, नंबर तीन 7 साल के अंदर एकमात्र राजस्थान राज्य हिंदुस्तान के अंदर होगा जिसने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को बदलने की मांग नहीं की, न सीनियर्स ने न जूनियर्स ने।”

अपने बयान में गहलोत ने आगे कहा, “एक छोटी खबर नहीं पढ़ी होगी किसी ने कि पायलट साहब को हटाना चाहिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से। हम जानते थे ये निकम्मा है..नाकारा है..संगठन की दृष्टि से, कुछ काम नहीं कर रहा है, खाली लोगों को लड़वा रहा है। मेरे साथ हो कि नहीं हो, मैं यहां बैंगन बेचने नहीं आया हूं, मैं यहां कोई सब्जी बेचने नहीं आया हूं, मैं मुख्यमंत्री बनने आया हूं, तय कर लो कल तो तुम अशोक गहलोत के घर खड़े थे, परसों तुम एआईसीसी में सीपी जोशी के कमरे के बाहर खड़े थे, मैं कैसे विश्वास तुम्हारे ऊपर करूं? इस लैंग्वेज में वो सात साल निकाले हैं, फिर भी राजस्थान में हमारा कल्चर ऐसा है, हम नहीं चाहते हैं कि दिल्ली में लगे कि राजस्थान वाले आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं, एक शब्द किसी ने नहीं बोला उनके खिलाफ में, इतना उनका मान-सम्मान रखा। कैसे सम्मान दिया जाता है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को वो मैंने सबको सिखाया है राजस्थान के अंदर, कैसे प्रदेश अध्यक्ष जी आएं तो खड़े होना चाहिए हम लोगों को, उम्र पीछे है पद बड़ा होता है गरिमा का, ये तमाम कल्चर मैंने सिखाया है यहां के नेताओं को, मान-सम्मान दिया पूरा, सब-कुछ किया।

“वो व्यक्ति कांग्रेस की पीठ के अंदर छुरा घौंपकर जाने के लिए तैयार हो जाए, ये जो खेल अभी हुआ है ये 10 जून को होता, 19 को चुनाव थे राज्यसभा के, 10 जून को रात को 2 बजे गाड़ियां रवाना हो रही हैं यहां पर मानेसर के लिए, सुबह राजेश पायलट साहब की पुण्यतिथि थी, मूर्ति पर माल्यार्पण होगा, कुछ लोग वहां से जाएंगे सीधे एयरपोर्ट जाएंगे और आगे चले जाएंगे। उस कॉन्सिपरेसी को मैंने एक्सपोज़ किया, सबको बुलाया, उस वक्त भी 10 दिन रहना पड़ा होटल के अंदर, अच्छी बात है क्या? ये अच्छी बातें नहीं हैं। सुनिए, इस रूप में ये पूरा खेल चला है। अब मैं पूछना चाहता हूं एआईसीसी अध्यक्ष बनने की जब ख्वाहिश देखे तो मुंबई का कॉर्पोरेट हाउस जो है, मुंबई के कॉर्पोरेट हाउसेज़ के लोग उनको स्पॉन्सर करे, अध्यक्ष एआईसीसी का बने, स्पॉन्सरशिप मुम्बई से हो रही है कॉर्पोरेट हाउसेज की, क्योंकि आप कॉर्पोरेट मिनिस्टर रहे हुए थे। अभी वकील साहब बोल रहे थे लंदन से, कौन हैं वकील वो? हरीश साल्वे जी लंदन से, किसके वकील हैं? कॉर्पोरेट हाउसेज के वकील बने हैं। इनकी फीस कितनी होती है? एक पेशी की 50 लाख होती है, 40 लाख होती है, 30 लाख होती है, वो लोग हैं। दूसरे वकील कौन हैं? मुकुल रोहतगी साहब, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया और बीजेपी के एक खास चहेते, वो खड़े हैं यहां पर, उनकी फीस भी 50-40 लाख है, ये पैसा कहां से आ रहा है? क्या पायलट साहब जेब से दे रहे हैं पैसा?”

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पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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