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“सचिन पायलट ने 6 महीनें पहले ही पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था”: अशोक गहलोत

सचिन पायलट या अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि सचिन पायलट ने 6 महीनें पहले ही कांग्रेस पार्टी छोड़ने का प्लान बना लिया था। उन्होनें बताया कि सचिन अपने कुछ नेताओं के साथ बीजेपी ज्वाइन करना चाहते थे, लेकिन जब वह बात नहीं बनी तो उन्होनें थर्ड फ्रंट भी बनाने की सोची थी।

एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में अशोक गहलोत ने इस बारे में कहा, “इन्होनें पहले प्रयास किया कि मैं बीजेपी जॉइन करूं जैसे सिंधिया साहब ने किया था। पहले प्रयास किया था कि बीजेपी जॉइन करें हम लोग, 6 महीने पहले, उनके साथी जो थे उन्होंने मना किया हम बीजेपी में तो नहीं जाएंगे, पर आपको साथ दे सकते हैं। तो फिर कहा, बीजेपी जॉइन नहीं करते हैं, तीसरा मोर्चा बनाएंगे, नई पार्टी बनाएंगे और सरकार गिराएंगे और बीजेपी समर्थन देगी। जब हम लोग एमएलए के रूप में इस्तीफ़ा देंगे, बीजेपी हमारे सामने किसी को खड़ा नहीं करेगी। हम जीतकर आएंगे, सरकार चलाएंगे और बीजेपी के साथ में नीतीश जी अगर सरकार चला सकते हैं तो हम क्यों नहीं चला सकते?”

गहलोत ने आगे कहा, “जब राज्यसभा के चुनाव थे तो हमने 10 दिन तक विधायकों को साथ रखा, क्या जरूरत थी बता दीजिए? रात को 2 बजे वही खेल होना था जो अब हुआ है बाड़ाबंदी का। सब तय हो गया था, बड़ी स्कीम थी, रात को दो बजे गाड़ियां रवाना होतीं, 11 तारीख को हमारे स्वर्गीय नेता राजेश पायलट साहब की पुण्यतिथि थी, माल्यार्पण होता, कुछ विधायक उनके साथ दिल्ली पहुंचते। हम लोगों ने टाइमली सबको इकट्ठा करके और जो इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया था और सब लोगों को एकजुट रखा हम लोग दोनों सीटें जीत गए थे।”

सचिन पायलट को पद से हटाने पर गहलोत ने कहा, “ये तो प्रोसेस से हुआ है, ये तो एंटी-डिफेक्शन लॉ बना हुआ है देश के अंदर। सुप्रीम कोर्ट के जो निर्णय हैं देश के अंदर उसके आधार पर पिटीशन हुई है। अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टी में है एमएलए अगर वो अपनी मंशा प्रकट करता है कि मैं अलग हो रहा हूं और पार्टी के आदेश को नहीं माने इसका मतलब आपकी मंशा अलग होने की है, उसके लिए प्रोसेस चलता है। उसके अंतर्गत उनको, हमने पिटीशन दी है, अब काम विधानसभा के स्पीकर का है कि वो सुनवाई करके कुछ फैसला करेंगे।”

सचिन पायलट को एसओजी का नोटिस भेजे जाने पर गहलोत ने सफाई देते हुए कहा, “वो नोटिस नहीं था, वो सहानुभूति लेने के लिए और हमेशा उनकी यही एप्रोच रहती है, उसमें उनकी मास्टरी भी है कि कैसे मीडिया में ऐसा मैसेज जाए कंट्री के अंदर, आम लोगों के अंदर कि बेचारा बन जाए कि ये बेचारा भला आदमी है, अच्छा काम कर रहा था, खूब मेहनत की राजस्थान के अंदर, सरकार इसने बना दी, 21 पर आए हुए थे सरकार बना दी, ये कोई नहीं देखता है कि 99 पर ही हम क्यों आए। 150 आने को उम्मीद थी यहां पर, दुनिया कह रही थी 150 क्रॉस कर रही है, 99 पर क्यों आई ये मैं पूछना चाहता हूं। मैं पूछ इसलिए नहीं रहा हूं कि झगड़े नहीं बढ़ें इसलिए मैं बोला नहीं कभी। मेहनत क्या थी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मैं तीन बार रहा, वो तो कांग्रेस की नीति, उसकी पॉलिसी पहुंचाऊं, नेता सोनिया गांधी चाहे राहुल गांधी हो, उनका मैसेज कैंपेन चलता है सब मिलकर करते हैं। इन्होंने मीडिया को और मीडिया ने भी अच्छा मैनेजमेंट किया हुआ है। मीडिया खुद ही लिखता है, बेचारे ने खूब मेहनत की 4-5 साल तक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बन गए।”

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पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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