सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

सऊदी की तेल कंपनी पर हमले की जिम्मेदारी हौथी विद्रोहियों ने ली

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

यमन के हौथी विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब की अरामको तेल कंपनी की फैक्ट्रीयो पर ड्रोन से हमला करने की जिम्मेदारी ली थी। यह दुनिया में सबसे अधिक तेल उत्पादन करने वाली फैक्ट्री हैं और इसमें आग लग गयी थी। इस समूह ने धमकी दी कि सल्तनत के खिलाफ हौथियो के हमले में में व्यापक वृद्धि होगी।

सऊदी अरब के आंतरिक मंत्रालय ने ने कहा कि “उन्होंने कंपनियों में लगी आग पर काबू पा लिया है। हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी को कोई नुकसान हुआ है या नहीं। अरामको को अतिरिक्त सुरक्षा टीम ने दोनों कंपनियों में आग से निपटना शुरू कर दिया है।”

सऊदी अरामको राज्य द्वारा संचालित और नियंत्रित कंपनी है, इसके अधिकतर भाग पर सल्तनत के रिफाइनरी प्रोडक्शन और आयलफील्ड का अधिकार है। रेवेन्यू के मामले में यह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और विश्व की सबसे अधिक मुनाफा देने वाली कंपनी है।

यमन में ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों के खिलाफ चार सालो से अरब सेना गठबंधन का नेतृत्व कर रहा है। अरब गठबंधन का नेतृत्व सऊदी अरब कर रहा है और वह चार सालों से अधिक समय से यमन में हौथी विद्रोहियों के खिलाफ है। वह अंतरराष्ट्रीय समर्थित हादी सरकार का पक्षधार है।

पश्चिम समर्थित सुन्नी मुस्लिम गठबंधन सऊदी अरब और यूसी ने यमन में साल 2015 में दखल दिया था।, ताकि अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन की सरकार को वापस सत्ता पर बैठाया जा सके। हौथी विद्रोहियों का देश के अधिकतर भागो पर नियंत्रण है। इसमें राजधानी सना भी शामिल है और साल 2014 के अंत में राष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हदी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से हटने के मज़बूर किया था।

संयुक्त राष्ट्र ने इस संघर्ष को विश्व का सांसे बड़ा मानवीय संकट करार दिया है। इसमें लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और लाखों को सहायता की जरुरत है।

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