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    अरब नेता

    सऊदी अरब में ुगुरूवार को अरब नेता एकत्रित हुए थे। रियाद ने तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद तत्काल इस बैठक का आयोजन किया था ताकि ईरान को एक सख्त सन्देश दिया जा सके कि क्षेत्रीय ताकते अपने हितो के खिलाफ किसी भी खतरे से संरक्षण करेगी।

    सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात ने सऊदी के तेल पम्पिंग स्टेशनो में हमले और यूएई के तट पर तेल टैंकरों के क्षतिग्रस्त हो जाने पर युद्ध न करने इच्छा व्यक्त की थी। रियाद ने आरोप लगाया कि ईरान के आदेश पर ही हौथी विद्रोहियों ने तेल पम्पो पर ड्रोन से हमला किया गया था।

    अमेरिका के आला रक्षा अधिकारी ने कहा कि “ईरान की खनन में टैंकर अभियान का इस्तेमाल किया गया है।” हालाँकि तेहरान ने इन आरोपों से पल्ला झाड़ लिया है। सऊदी के विदेश मंत्री इब्राहिम अल असफ ने समकक्षीयों के एकजुट होने कहा कि “हमले को दृढ़ता और मज़बूती से सम्बोधित करने की जरुरत है।”

    रायटर्स के मुताबिक सऊदी के पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख और राजदूत प्रिंस तुर्की अल फैसल ने कहा कि “नेताओं के सम्मेलन में युद्ध से बचने के बेहतरीन विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच किंग सलमान सऊदी अरब और अरब के हितो की रक्षा के लिए समानता से संकल्पित है।”

    उन्होंने कहा कि “सुन्नी मुस्लिम खाड़ी नेताओं और अरब नेताओं की मध्य रात्रि में मेक्का में मुलाकात होगी जहां अरब के मामलो में शिया ईरान की दखलंदाज़ी के बाबत चर्चा की जाएगी।” अमेरिका द्वारा ईरान के साथ साल 2015 में की गयी परमाणु संधि के तोड़ने के बाद तनाव काफी बढ़ गया है।

    अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलहकार जॉन बोल्टन ने बुधवार को कहा कि “यूएई के तट के नजदीक हमला सल्तनत की तेल पाइपलाइन में हमले से जुड़ा हुआ है और एक रॉकेट ने बगदाद के ग्रीन जोन में हमला किया था। किसी के भी दिमाग में यह सन्देश नहीं होगा की इस हमले का जिम्मेवार कौन है और मेरे ख्याल से यह महत्वपयण है कि ईरानी नेतृत्व को मालूम कि हम सब जानते है।”

    उन्होंने कहा कि “अमेरिका विवेकी और जिम्मेदार दृष्टिकोण लेने की कोशिश कर रहा है लेकिन तेहरान को नए हमले के लिए चेतावनी देते हैं।” ईरानी अधिकारी ने बोल्टन के दावे को खारिज कर दिया और इसे ऊटपटांग करार दिया था।

    खाड़ी सहयोग परिषद् के तहत खाड़ी देशों का एक संयुक्त बल है लेकिन 39 वर्ष पुराने इस गठबंधन में दरार आ गयी थी जब साल 2017 में सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और अन्य गैर जीसीसी देशो ने क़तर का राजनीतिक और आर्थिक बहिष्कार कर दिया था। सऊदी के बादशाह ने मेक्का मुलाकात में क़तर को भी आमंत्रित किया था।

    इराक और ओमान के तेहरान और वांशिगटन के साथ अच्छे सम्बन्ध है। उन्होंने कहा कि “वह तनाव को कम करने के लिए कार्य कर रहे हैं। दोहा ने मदद का प्रस्ताव दिया है। ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने इस माह के शुरुआत में इराक की यात्रा की थी और यह खाड़ी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करने का संकेत  था और उन्हें गई आक्रमक संधि पर हस्ताक्षर करने का प्रस्ताव भी दिया था।”

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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