श्रीलंका राजनीतिक घमासान: तमिलों ने किया बर्खास्त प्रधानमन्त्री रानिल विक्रमसिंघे को समर्थन

श्रीलंका में उपजा राजनीति संकट

श्रीलंका में राजनीतिक संकट के दौर में रीजन कोई नया पहलु जुड़ता जा रहा है। गुरूवार को तमिल सांसदों ने बर्खास्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को अपना समर्थन दिया है। संसद में तमिल नेशनल अलायन्स ने शक्ति का संतुलन किया और बीते दिनों में किंगमेकर बनकर उभरा है।

श्रीलंका में 26 नवम्बर को राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंह एको प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर, पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को सत्ता की कमान सौंप दी थी। श्रीलंका के सदन में पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के खिलाफ दो दफा अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया हैं।

संसद में बीते दिनों रानिल विक्रमसिंघे और महिंदा राजपक्षे के समर्थकों के मध्य विवाद बढ़ गया था। राष्ट्रपति मैत्रिपाला पर अपने प्रधानमन्त्री पद पर बैठाये राजपक्षे के चुनाव को सही साबित करने का दबाव है। रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सरकार बनाने के लिए बहुमत का आनंद ज्यादा दिन तक नहीं उठा पायेंगे।

श्रीलंका के दोनों विरोध दल सत्ता में बने रहने के लिए सभी पैंतरे आजमा रहे हैं। गुरूवार को द्विप के सबसे बड़े संजातीय समूह ने तमिलों के गटबंधन ने रानिल विक्रमसिंघे को अपना समर्थन दिया है। इस गठबंधन के समक्ष 14 सीटें हैं जो विक्रमसिंघे का संसद में बहुमत साबित करती है।

तमिल विधायक धर्मलिंगन सिथाद्थान ने कहा कि हम ऐसा किसी का समर्थन नहीं करते लेकिन लोकतंत्र के हित के कारण हमें बाहर निकलना पड़ा और हित के खड़ा होना पड़ा था। महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति कार्यकाल में दशकों से चल रहे तमिल विद्रोह को कुचलने के लिए साल 2009 में हिंसक रुख अपनाया था। उनके आदेश के बाद सैनिकों ने दस हज़ार तमिल लोगों की हत्या की गयी थी।

रविवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा कि वह दोबारा बर्खास्त प्रधानमन्त्री रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री के पद पर नहीं आसीन करेंगे। श्रीलंका की संसद में रानिल विक्रमसिंघे की पार्टी के समक्ष बहुमत है और राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किये गए पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ सदन में दो बार अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत पारित हो चुका है।

राष्ट्रपति सिरिसेना ने विदेशी प्रनितिधियों से मुलाकात के बाद बर्खास्त प्रधानमन्त्री की आलोचना करते हुए कहा कि वह बहुत बड़े भ्रष्टाचारी हैं। उन्होंने कहा कि यदि रानिल विक्रमसिंघे के दल के समक्ष बहुमत है, फिर भी मैं उनसे मेरे रहते हुए प्रधानमन्त्री पद पर नहीं बैठने दूंगा, मैं विक्रमसिंघे को प्रधामंत्री पद पर नहीं स्वीकार करूँगा। उन्होंने कहा कि विक्रमसिंघे से उनके कोई निजी मतभेद नहीं है बल्कि उनकी नीतियों पर असहमति है। उन्होंने कहा कि यही परंपरा है कि कोई व्यक्ति अगर पीएम बनता है तो उसे राष्ट्रपति के साथ मिलकर कार्य करना होता है लेकिन मैं रानिल के साथ काम नहीं कर सकता हूं।

हाल ही में संसद में विवादित प्रधानमंत्री राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर विपक्षी दल के समर्थकों  ने सदन में जमकर हंगामा मचाया था। राजपक्षे के वफादारों ने सदन में अध्यक्ष पर मिर्ची पाउडर, फर्नीचर और अन्य सामान फेंके, जिससे सदन में गतिरोध बढ़ गया था। श्रीलंका में बिना सरकार के साल 2019 में बजट पारित नहीं हो पायेगा। मूडी ने हाल ही में श्रीलंका की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट दर्ज की थी और महत्वपूर्ण विदेशी कर्ज पर चेतावनी दी थी।

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