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    श्रीलंका के प्रधानमन्त्री

    श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने संसद के अध्यक्ष के समक्ष एक राष्ट्रीय सरकार के गठन का उपाय सुझाया है, ताकि 225 सदस्यीय सदन में बहुमत मिल सके। सदन के नेता लक्ष्मण किरिएल्ला ने इस प्रस्ताव को अध्यक्ष कारू जयसूर्या के समक्ष प्रस्तावित किया है।

    बीते वर्ष अक्टूबर में राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमन्त्री पद से बर्खास्त कर, पूर्व ताकतवर राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को गाड़ी सौंप दी थी। साथ ही राष्ट्रपति ने संसद को भंग कर श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के सभी सांसदों को भी निलंबित कर दिया था।

    सदन में महिंदा राजपक्षे बहुमत साबित करने में असमर्थ रहे थे, नतीजतन दबाव के कारण रानिल विक्रमसिंघे को दोबारा प्रधानमन्त्री पद की शपथ ग्रहण करवानी पड़ी थी। दिसम्बर में पद पर नियुक्ति के बाद विक्रमसिंघे के नेतृत्व की सरकार सदन में बिना बहुमत के कार्य कर रही है। 225 में से विक्रमसिंघे के समक्ष 113 सांसद ही है।

    सदन के नेता ने कहा कि “राष्ट्रीय सरकार के गठन के प्रस्ताव को सुबह ही अध्यक्ष कारू जयसूर्या के दफ्तर में सौंप आया हूँ।” मंत्री मानो गणेसन ने कहा कि सरकार का विस्तार करने के लिए मैत्रिपाला सिरिसेना की पार्टी एसएलएफपी से बातचीत की जा रही है।

    विक्रमसिंघे की पार्टी ने साल 2015 में मैत्रिपाला सिरिसेना की पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बनायीं थी।  इससे राजपक्षे का 10 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया था। तीन सालों तक विरोधी विपक्षी होने के बाद, राजपक्षे और सिरिसेना ने सांठ गाँठ कर, विक्रमसिंघे को गेम से आउट कर दिया था। महिंदा राजपक्षे की विपक्षी सरकार अगस्त 2020 में नए सिरे से चुनाव का आयोजन करने की मांग कर रही है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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