मंगलवार, दिसम्बर 10, 2019

हैदराबाद के बाद अब शिवसेना ने की उस्मानाबाद और औरंगाबाद के नाम बदलने की मांग

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आदर्श कुमार
आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कल कहा कि गुजरात सरकार अहमदाबाद का नाम बदल कर कर्णावती करने की सोच रही है। वहीँ गुजरात के पडोसी महाराष्ट्र में शिवसेना ने मांग की है कि औरंगाबाद का नाम बदल कर संभाजी नगर और उस्मानाबाद का नाम बदल कर धाराशिव किया जाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इलाहाबाद और फैज़ाबाद का नाम बदलने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री रुपानी ने गुजराती नववर्ष के अवसर पर ये घोषणा की।

भाजपा शासित हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला का नाम बदलकर श्यामला रखने की योजना बनाई थी लेकिन स्थानीय नागरिकों के विरोध के बाद इस प्रस्ताव को ठन्डे बास्ते में डाल दिया गया।

रूपाणी ने एक सार्वजनिक समारोह के दौरान कहा, ‘हम अहमदाबाद के नाम को कर्णवती में बदलने पर विचार कर रहे हैं, जिसकी बात लंबे समय से चल रही है। कानूनी और अन्य कोणों के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद ठोस कदम उठाए जाएंगे।’

ये पूछे जाने पर की ये 2019 चुनावों के पहले होगा या बाद में? तो रुपानी ने कहा ‘2019 चुनावों से पहले हो जाएगा।’

महाराष्ट्र में शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा कि वो औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम कब बदल रहे हैं ?

शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने की मांग नयी नहीं है। तत्कालीन कांग्रेस और एनसीपी सरकार ने मुस्लिम वोट खोने की डर से इन मांगो को अनसुना कर दिया था।

औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग सबसे पहले बाला साहेब ठाकरे ने 1988 में की थी। शिवसेना प्रशासित औरंगाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 1995 और 2001 में इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा था लेकिन राज्य सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था।

शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार चला रही भाजपा ने पूर्व में इन मांगो का समर्थन किया था।

औरंगाबाद को पहले खिड़की कहा जाता था। मुग़ल शासक औरंगजेब ने 17वीं शताब्दी में इसका नाम औरंगाबाद कर दिया। उस्मानाबाद का नाम हैदराबाद के निज़ाम मीर उस्मान अली के नाम पर रखा गया। मराठवाड़ा में शामिल होने से पहले उस्मानाबाद, हैरदाबाद रियासत के अंतर्गत आता था।

मराठवाड़ा के शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री दिवाकर रावते ने कहा कि ‘हम चाहते हैं उस्मानाबाद को उसके असली नाम से जाना जाए।’

भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा कि भाजपा भी इन शहरों के नाम बदलने के पक्ष में है।

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