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    शिवपाल सिंह

    रविवार को ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी’ के नेता शिवपाल यादव ने कहा कि अयोध्या में विवादित ज़मीन पे राम मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर बात अब नहीं होनी चाहिए।

    मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, “मेरे हिसाब से, विवादित ज़मीन पे राम मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर बात अब नहीं होनी चाहिए। हमने देख लिया है कि इस सब के चक्कर में कितना नुकसान हो चुका है। हमे शांति ना बनाये रखने के लिए पूरी दुनिया ने बदनाम किया था । लोग अब इस मंदिर-मस्जिद के दिखावे में अब नहीं आएंगे।”

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पे निशाना साधते हुए यादव ने भाजपा पे इलज़ाम लगाया कि वे असली मुद्दे और विकास पे ध्यान नहीं दे रही है। उनके मुताबिक, “शहरों के नाम बदलने से और मुर्तिया बनाने से कोई फायदा नहीं होगा। विकास तो कही हुआ ही नहीं है। सड़को की हालत अभी भी खराब है। भ्रष्टाचार अपने मुकाम पर है। लोगो को नौकरियाँ नहीं मिली है। मैं सोचता हूँ कि ये सरकार की प्राथमिकताएं होनी चाहिए।”

    राम मंदिर के निर्माण कार्य का मुद्दा तब ज्यादा उछला जब “राम मंदिर-बाबरी मस्जिद केस” का मुकदमा करने वाले मोहम्मद इक़बाल अंसारी ने कहा कि वे कानून का पालन करेंगे और फैसले का स्वागत करेंगे।

    29 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने “राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस” की सुनवाई जनवरी 2019 तक टाल दी थी। इन्होने 2010 के अलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए ये किया था। अलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में ये फैसला दिया था कि विवादित ज़मीन तीन भागो में बाट दी जाए। एक निर्मोही अखाड़ा के लिए, एक सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड और आखिरी राम लला के लिए।

    हिंदु कार्यकरताओं का ऐसा कहना है कि 1528 में अयोध्या में मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनाई थी। इसके बाद 6 दिसंबर 1992 को उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था।

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    By साक्षी बंसल

    पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

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