Wed. May 29th, 2024
    फ्लिपकार्ट वालमार्ट डील

    वॉलमार्ट द्वारा चलाई जाने वाली भारत के सबसे बड़े इ कोमर्स बिज़नस में से एक फ्लिप्कार्ट में हाल ही में ₹2,190.64 करोड़ का निवेश किया है। यह निवेश इक्विटी शेयर के रूप में किया गया है। फ्लिपकार्ट प्राइवेट लिमिटेड को 1 रूपये प्रति शेयर के मूल्य वाले 7,45,118 इक्विटी शेयर 29399 रूपये प्रति शेयर के प्रीमियम पर आवंटित किये गए हैं।

    इस साल मई में अमेरिका की खुदरा कंपनी वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी 16 अरब अमरीकी डॉलर्स में हासिल की थी जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा सौदा माना गया था। इस सौदे के बाद एक के बाद एक फ्लिप्कार्ट के पुराने सदस्य अपने शेयर बेच कर यहाँ से निकलते गए यहाँ तक की सह संस्थापक सचिन बंसल ने भी उस सौदे के बाद  फ्लिपकार्ट छोड़ दिया था।

    फ्लिप्कार्ट को इस साल मई में खरीदने के बाद वॉलमार्ट ने पहली बार इसमें निवेश किया है। इतना बड़ा निवेश यह साफ़ ज़ाहिर कर रहा है की वालमार्ट भारत में फ्लिप्कार्ट के अहम् प्रतिद्वंदी अमेज़न को पीछे छोड़ना चाहती है। भारत में अमेज़न एक सबसे बड़ा इ कॉमर्स बिज़नस है।

    फ्लिप्कार्ट के संस्थापक का बयान

    फ्लिप्कार्ट के संस्थापक के.वैथीस्वरण ने इस पर बयान देते हुए कहा की यह भविष्य में होने वाले कई बड़े निवेशों में से पहला है जो की फ्लिप्कार्ट के बचे हुए धारकों के शेयर खरीदने में भी प्रयोग हो सकते थे लेकिन अभी यह काम को दक्षतापूर्वक चलाये रखने के लिए किये जा रहे हैं।

    उनके अनुसार यह निवेश मुख्यतः फ्लिप्कार्ट की श्रृंखला आपूर्ति एवं मशीनी एकाकीकरण में जाएगा। इससे नए लोगों को रोज़गार दिया जाएगा ताकि नए टैलेंट को कंपनी में जगह मिलेगी जिससे कंपनी को नए दायरे छूने में मदद मिलेगी। फ्लिप्कार्ट अब किराने कि दुकानों से जुड़कर सब्जियों की होम डिलीवरी भी शुरू करने की सोच रहा है।

    वालमार्ट का सिद्धांत : लागत युक्तिकरण

    वालमार्ट भारतीय कंपनी फ्लिपकार्ट को पूरी तरह बदलने में लगी हुई है। इसने जबोंग में से 60 प्रतिशत कर्मचारियों को निकाल दिया है एवं अब वह सभी विभागों को अपने हिसाब से चलाकर नए टैलेंट को जगह दे रहा है। वालमार्ट इतना ही नहीं अब कर्मचारियों की संख्या और भी काम करने पर विचार कर रही है जिससे वह लागत  को घटा कर अपने सिद्धांतों का पालन करे।

    इससे फ्लिपकार्ट के पुराने सदस्य आहत हैं एवं सचिन बंसल ने हिस्सेदारी बेचते ही इसे छोड़ दिया था जबकि बिन्नी बंसल सहसंस्थापक ने कुछ समय पहले ही छोड़ा है।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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