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    भारत और भूटान

    भारत के विदेश म्नत्री एस जयशंकर को भूटान के प्रधानमंत्री लोटय त्शेरिंग ने शुक्रवार को तशोकहंग में मुलाकात के लिए बुलावा भेजा था। जयशंकर ने विदेश विभाग का प्रभार सँभालने के बाद पहली आधिकारिक यात्रा भूटान की की है। भूटान और भारत के बीच पारम्परिक सम्बन्ध है।

    मुलाकात के बाद उन्होंने ट्वीट कर कहा कि “दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय साझेदारी के महत्वपूर्ण तत्वों पर सौहार्दपूर्ण बातचीत की थी। भूटान के प्रधानमंत्री डॉक्टर लोटय त्शेरिंग का बुलावा आनंदित था मैं अपने साथ नरेंद्र मोदी का आभार लेकर गया था और  नों पक्षों ने द्विपक्षीय साझेदारी के महत्वपूर्ण तत्वों पर सौहार्दपूर्ण बातचीत की थी।”

    त्शेरिंग बिम्सटेक के नेताओं में शामिल थे जो 30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। विदेश मंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा पड़ोसी मुल्क भूटान की अहमियत को प्रदर्शित करती है। भूटान के प्रधानमंत्री ने पद सँभालने के बाद देश की यात्रा करने की तारीफ़ की थी।

    त्शेरिंग ने ट्वीट कर कहा कि “भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर को भूटान के प्रधानमंत्री डॉक्टर लोटय त्शेरिंग ने बुलावा भेजा था। ल्योनचेन ने स्वागत किया और विदेश मंत्री के पद पर आसीन होने के तुरंत बाद भूटान की यात्रा के लिए आभार व्यक्त किया था।”

    इस पूर्व जयशंकर ने भूटानी समकक्षी डॉक्टर तांडी दोरजी से द्विपक्षीय मुलाकात की थी और इस दौरान संयुक्त हितो के मामलो पर चर्चा की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि “समय पर परीक्षा देने वाली दोस्ती की नयी शुरुआत। जयशंकर ने अपने भूटानी समकक्षी से मुलाकात की। दोनों के बीच उम्दा सम्बन्ध कायम हुए है, जिसकी नीव हमारे सम्राटो ने रखी थी और सफलता नेताओं ने इसे आगे बढ़ाया है।”

    भूटान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान वह भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक का इस्तकबाल करेंगे।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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