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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफ़ग़ानिस्तान मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक को किया सम्बोधित

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को तालिबान (Taliban) के अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान (Afghanistan) की स्थिति को गंभीर बताया और कहा कि भारत दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह “रुको और देखो” नीति का पालन कर रहा था। संसद भवन में आयोजित अफगानिस्तान की स्थिति पर एक सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि इस समय भारत सरकार की प्राथमिकता युद्धग्रस्त देश से भारतीय नागरिकों और अफगान भागीदारों को निकालना है।

बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि, “यह एक उभरती हुई स्थिति है और मैं सभी से धैर्य रखने का अनुरोध करता हूं ताकि स्थिति सामान्य होने के बाद हम आपको बता सकें कि भारत का रुख क्या है।”

37 नेता हुए बैठक में शामिल

यह बैठक साढ़े तीन घंटे तक चली और इसमें 31 राजनीतिक दलों के 37 नेताओं ने भाग लिया जिनमें कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, मल्लिकार्जुन खड़गे और आनंद शर्मा; राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार; तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय और सुखेंदु शेखर रॉय; पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा; द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद तिरुचि शिवा और टी.आर. बालू; तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) नामा नागेश्वर राव; तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) जयदेव गल्ला; और भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम शामिल रहे। विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत रुद्रेंद्र टंडन भी ब्रीफिंग में उपस्थित थे। इसके साथ राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सांसदों को किया सम्बोधित

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सांसदों को भारतीय दूतावास के कर्मचारियों की निकासी और विभिन्न शहरों में भारत के वाणिज्य दूतावासों को बंद करने के बारे में जानकारी दी और कहा कि दूतावास बंद होने के बाद निकासी की सुविधा के लिए एक टीम को काबुल हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है। एस जयशंकर ने कहा कि सरकार ने अब तक छह निकासी उड़ानों में कुल 565 लोगों को निकला है। इनमे से 175 दूतावास कर्मियों, 263 अन्य भारतीय नागरिकों, 112 अफगान नागरिकों और 15 अन्य देश के नागरिकों को निकाला है।

सांसदों के सामने अपनी प्रस्तुति में विदेश मंत्री ने उन कठिन परिस्थितियों को स्पष्ट किया जिनके तहत निकासी हो रही थी जिसमें केंद्रीय कमान और नियंत्रण की कमी, तालिबान द्वारा उम्मीद से पहले काबुल का अधिग्रहण और अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी की तारीख को आगे लाना शामिल था। प्रस्तुति में अफगान मुद्दे पर हुई विभिन्न वार्ताओं और जमीनी घटनाक्रम के संदर्भ में समानांतर में क्या हुआ इसका विवरण भी विदेश मंत्री ने दिया।

बैठक में मौजूद विपक्षी सांसदों ने कहा कि सरकारी वार्ताकारों ने यह भी बताया कि काबुल हवाई अड्डे पर संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादी भी हमला कर सकते हैं।

ब्रीफिंग के बाद बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा कि, “इस [अफगानिस्तान] मामले पर सभी राजनीतिक दलों के विचार समान हैं। हमने राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ इस मुद्दे पर संपर्क किया।” ब्रीफिंग की सराहना करते हुए विपक्षी नेताओं ने विदेश मंत्री जयशंकर के लिए कुछ सप्ताह पहले अफगानिस्तान से एक महिला संसद सदस्य के भारत से निर्वासन पर कठिन सवाल किए।

विपक्षी सांसदों ने उठाये सरकार की नीति पर कई सवाल

एस जयशंकर ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए इसे दिल्ली हवाई अड्डे पर “अति सतर्क” आव्रजन अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय बताया। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे को मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाया था जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। जवाब में विदेश मंत्री जयशंकर ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अलग घटना थी और भारत ने कई अन्य अफगान सांसदों को बचाया है।

विपक्ष के नेता खड़गे ने 31 अगस्त की समय सीमा के बाद भारतीयों को निकालने के लिए सरकार की आकस्मिक योजना पर भी कई सवाल उठाए और बताया कि भारतीयों की काफी संख्या को अभी भी निकाला जाना बाकी है। सूत्रों ने दावा किया कि सरकार ने अभी तक खाली कराए जाने वाले नागरिकों की सही संख्या साझा नहीं की है।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने तालिबान के उदय के मद्देनजर विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर में सरकार के आतंकवाद विरोधी उपायों के बारे में भी पूछा। क्षेत्र में सुरक्षा पर तालिबान के प्रभाव के मुद्दे को उठाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने जोर देकर कहा कि जम्मू और कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करके राजनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाना चाहिए।

पीएम की अनुपस्थिति पर भी उठे सवाल

बैठक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति के बारे में भी सवाल उठाए गए थे। विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह एक शिष्टाचार था कि उनके पूर्ववर्ती अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा विपक्ष को बढ़ाया। सूत्रों के अनुसार विपक्षी नेता खड़गे ने कहा कि प्रधान मंत्री मोदी को ऐसी बैठक में उपस्थित होना चाहिए था।

पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देव गौड़ा ने कहा कि अफगानिस्तान में उनके प्रधानमंत्रित्व काल में भी इसी तरह की अनिश्चितता बनी हुई थी और वर्तमान सरकार को आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे को सामने लाने की जरूरत है।

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन.के. प्रेमचंद्रन, भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम और सीपीआई (एम) के पीआर नटराजन ने विदेश मंत्री जयशंकर को इसे भारत का “भव्य अलगाव” कहा। सूत्रों के अनुसार सीपीआई (एम) नेता नटराजन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने अभियान भाषणों में घोषणा की थी कि अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस ले लेगा। पूर्व चेतावनी के बावजूद भारत तैयार क्यों नहीं था, सांसद ने पूछा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या अमेरिका ने भारत को अपने फैसले की जानकारी में रखा था जब उन्होंने अपनी सेना की वापसी को आगे बढ़ाने का फैसला किया था।

About the author

आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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