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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली, भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह और कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से बुधवार देर रात मुलाकात की, ताकि 2019 के आम चुनाव से पहले किसानों के लिए संभावित राहत पर चर्चा की जा सके। यह एक स्पष्ट संकेत है कि एनडीए सरकार देश में राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण कृषि संकट का जवाब देने के लिए अच्छी तरह से तैयार है।

    प्रधानमंत्री और उनके शीर्ष मंत्री सहयोगियों के बीच बीजेपी प्रमुख की मौजूदगी में गुरुवार को दो घंटे तक चर्चा चली। प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों के बीच पिछले हफ्ते संभावित कृषि समाधानों पर मंत्री स्तरीय बैठकों से पहले भी कई बैठकें हुई थी। मामले पर एक जानकार ने कहा कि किसी इ योजना को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और राजनितिक रूप से आकर्षक होना होगा क्योंकि अब चुनावों में ज्यादा समय नहीं है।

    पैदावार में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण फसलों का सही दाम नहीं मिल पाना ऊपर से किसानों पर कर्जे का बोझ, ये कीच ऐसे मुद्दे हैं जो आगामी आम चुनाव में सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।

    कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों का लोन माफ़ करने का वादा किया और सत्ता में आते ही लोन माफ़ कर दिया, भले ही शर्तों के साथ माफ़ किया। इस ऋण माफ़ी से कितने किसानों को फायदा हुआ या होगा ये तो बात की बात है लेकिन इस कदम से कांग्रेस ने खुद को किसान हितैषी साबित करने में सफलता पायी जिसने केंद्र सरकार और भाजपा को इस मुद्दे पर बैकफुट पर ला खड़ा किया।

    सरकार के सामने चार व्यापक प्रस्ताव हैं, जिनका आगे की बैठकों में मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार ने पूरी तरह से ऋण माफी से इनकार नहीं किया है। लेकिन साथ ही सरकार ये भी मानती है कि ये एक पूर्णकालिक समाधान नहीं है। एक कारण यह है कि कई राज्यों ने पहले ही कई कृषि ऋण माफी की घोषणा की है। जबकि उनका राज्यकोष नुकसान की स्थिति में है। ऐसे में सरकार ऐसी योजना लाना चाहती है जो ऋण माफ़ी से भी ज्यादा आकर्षक हो।

    दूसरा, सरकार सीधे आर्थिक सहायता देने पर विचार कर रही है। ये योजना तेलंगाना और झारखंड में पहले से लागू है जिसमे फसलों से पहले सरकार किसानों के अकाउंट में कुछ रकम ट्रांसफर करती है जिससे उन्हें फसल बुआई में मदद मिलती है। मतलब अगर साल में खरेफ और रबी फसलों की बाई से पहले सरकार एक तय रकम किसानों के अकाउंट में ट्रांसफर करती है। तेलंगाना सरकार प्रत्येक भूमि मालिक किसान को 4,000 रुपये प्रति एकड़ की पेशकश करती है, जिसमें खरीफ और रबी मौसम में फैले 12,000 करोड़ रुपये का कुल खर्च होता है, पूरे भारत में दो बुवाई चक्र हैं।

    झारखंड ने खरीफ बुवाई से पहले सभी किसानों के लिए 5,000 रुपये प्रति एकड़ की घोषणा की, जिसमें राज्य में 2,250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 22 दिसंबर को, ओडिशा सरकार ने खेत क्षेत्र के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की।

    आने वाले दिनों में केंद्र सरकार किसानों को बड़ी खुशखबरी दे सकती है।

    By आदर्श कुमार

    आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

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