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रोहिंग्या मुस्लिमो के क़त्ल में कैद सैनिको की सजा पत्रकारों से कम

म्यांमार

म्यांमार के रखाइन प्रान्त में 10 रोहिंग्या पुरुषो और युवकों की हत्या करने पर सात सैनिको को जेल की सज़ा हुई थी और उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया गया था। दो पत्रकारों ने सैनिको के इस बर्बर कृत्य का खुलासा किया था और उनके मुकाबले सैनिको को काफी कम सज़ा दी गयी है।

दो जेल अधिकारीयों और पूर्व सह कैदियों ने रायटर्स से इस बात की पुष्टि की थी कि सैनिको की जेल की सज़ा को काम कर दिया गया है। उन्हें एक साल से भी कम सजा देकर बीते नवंबर में रहा कर दिया गया था जबकि उन्हें 10 वर्षों की कारावास की सज़ा सुनाई गयी थी।

वा लोने और क्याव सोए ऊ ने सैनिको के नरसंहार का सितम्बर 2017 में खुलासा किया था और उन्होंने जेल में 16 महीने व्यतीत किये थे और इस माह की शुरुआत में उन्हें रिहा कर दिया गया था। पत्रकारों के जोड़े को साल 2018 के टाइम्स पर्सन ऑफ़ द ईयर से नवाजा गया था।

पत्रकारों के लिए फरवरी 2018 में आधिकारिक गोपनीय अधिनियम का उल्लंघन करने के लिए सात वर्षो की सजा मुकर्रर की गयी थी। साल 2017 में रखाइन प्रान्त में सैन्य अभियान के कारण 700000 रोहिंग्या मुस्लिमों को बांग्लादेश की सरहद की तरफ भागना पड़ा था।

सैनिको ने रखाइन में मुस्लिमों के समूचे गाँव को आगजनी कर दिया था और वहां कार्रवाई के दौरान महिलाओं और लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। यूएन ने म्यांमार के सैन्य अधिकारीयों पर नरसंहार के आरोप लगाने की मांग की थी।

इस हत्याकांड में शामिल सात सैनिको को जेल की सज़ा हुई थी और सेना के मुताबिक, उन्होंने इस अभियान में शामिल सैनिको को सज़ा दे दी है। म्यांमार द्वारा इस संकट के समाधान और शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। म्यांमार ने इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की यात्रा पर पाबंदी लगाई है।

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कविता

कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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