Wed. Oct 5th, 2022
    रेलवे टिकटों की दलाली करने वालों के खिलाफ एक्शन, ‘ऑपरेशन उपलब्‍ध’ के तहत 43 लाख रुपये के टिकट जब्त

    भारतीय रेलवे द्वारा क्षमता वृद्धि के बावजूद मांग आपूर्ति के अंतर में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि हुई है। इस मांग और आपूर्ति के अंतर के कारण दलालों की संख्या में बढ़ोत्‍तरी हुई है जो आरक्षित सीटों का अलग-अलग तरीकों से उपयोग करते हैं और उन्‍हें जरूरतमंदों को अधिक मूल्‍य पर बेचते हैं। ऑनलाइन कन्फर्म रेलवे आरक्षण करने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर के उपयोग से आम आदमी के लिए कन्फर्म टिकटों की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। रेलवे मंत्रालय के एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Railway Protection Force दलाली में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ “ऑपरेशन उपलब्‍ध” के तहत मिशन मोड में गहन और निरंतर कार्रवाई कर रहा है।

    RPF की टीम ने 8 मई को राजकोट के मन्नान वाघेला को पकड़ा है। वह ट्रैवल एजेंट है जो बड़ी मात्रा में रेलवे टिकटों को अवैध सॉफ्टवेयर ‘COVID-19’ का उपयोग करता था। 

    वहीं, एक अन्य व्यक्ति कन्हैया गिरी जो अवैध सॉफ़्टवेयर COVID-X, ANMSBACK, BLACK TIGER आदि के विक्रेता था। उन्हें वाघेला द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर 17 जुलाई को मुंबई से गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के दौरान गिरी ने अन्य सहयोगियों और वापी के डेवलपर अभिषेक शर्मा के नाम का खुलासा किया, जिन्हें 20 जुलाई को गिरफ्तार किया गया है। अभिषेक ने RPF के सामने इन सभी अवैध सॉफ्टवेयर्स के एडमिन होने की बात कबूल की है। गिरफ्तार आरोपी व्यक्तियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर, 3 और आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    ये आरोपी व्यक्ति IRCTC के फर्जी वर्चुअल नंबर और फर्जी यूजर आईडी प्रदान करने के साथ-साथ टेलीग्राम, व्हाट्सएप आदि का उपयोग करके इन अवैध सॉफ्टवेयरों के डेवलपमेंट और बिक्री में शामिल थे। 

    इन आरोपियों के पास नकली आईपी एड्रेस बनाने वाले सॉफ्टवेयर थे, जिनका इस्तेमाल ग्राहकों पर प्रति आईपी एड्रेस की सीमित संख्या में टिकट प्राप्त करने के लिए लगाए गए प्रतिबंध को दूर करने के लिए किया जाता था। 

    उन्होंने डिस्पोजेबल मोबाइल नंबर और डिस्पोजेबल ईमेल भी बेचे हैं, जिनका उपयोग आईआरसीटीसी की फर्जी यूजर आईडी बनाने के लिए ओटीपी वेरिफिकेशन  के लिए किया जाता है।

    इस मामले में आरोपित सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से 43,42,750/- मूल्‍य के 1688 टिकटों को भी जब्त किया गया, जिनपर यात्रा शुरू नहीं की जा सकी थी। विगत में, इन आरोपियों ने 28.14 करोड़ रूपये मूल्‍य के टिकट खरीदे और बेचे थे, जिसमें उन्हें भारी कमीशन मिला।

    भारतीय रेलवे ने बताया कि आरोपियों द्वारा दी गई जानकारी की एक टीम द्वारा जांच की जा रही है ताकि खामियों को दूर किया जा सके और इस तरह की गलत प्रथा को रोकने के उपाय किए जा सकें। भारतीय रेलवे ने जानकारी दी कि इस तरह का ऑपरेशन भविष्य में भी जारी रहेगा।

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