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    भारत समेत दुनिया भर में घूस या रिश्वत एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। ऐसे में भारतियों के बीच किए गए एक सर्वे में घूस को लेकर रोचक कुछ तथ्य सामने आए हैं।

    देश भले ही डिजिटल इकॉनमी की तरफ आगे बढ़ रहा हो, लेकिन घूस के मामले में लोग कैश को ही प्राथमिकता देते हैं।

    एक सर्वे के अनुसार करीब 40 प्रतिशत लोगों ने इस बात को स्वीकारा है कि उन्होने कभी न कभी कैश के रूप में घूस दी है। यह वो देश है, जिसमें हर चुनाव में हर नेता भ्रष्टाचार मिटाने की बात करता है।

    इंडियन करप्शन सर्वे 2018 के अनुसार 39 प्रतिशत भारतियों ने ये स्वीकारा है कि उन्होने कभी न कभी घूस दी है, जिसके लिए उन्होने कैश का ही इस्तेमाल किया है।

    ये सर्वे ऑनलाइन किया गया था, जिसमें करीब 1.6 लाख लोगों ने भाग लिया था। सामने आए आंकड़ों के अनुसार सामने आया है कि घूस देने के मामले में वर्ष 2017 में आंकड़ा 45 प्रतिशत का था, जो कि 2018 में बढ़कर 56 प्रतिशत का हो गया है।

    रोचक तथ्य ये सामने आया है कि देश में जिन ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है उनमें घूस लेने की घटनाएँ कम होती हैं। इस दौरान ऐसे ऑफिस जिनमें सीसीटीवी लगा है उनमें 13 प्रतिशत घटनाएँ सामने आई जबकि जिनमें सीसीटीवी नहीं लगा है उन ऑफिस से 31 प्रतिशत घटनाएँ निकल कर सामने आई हैं।

    आंकड़ों के अनुसार म्यूनिसिपल कार्पोरेशन में 18 प्रतिशत, पुलिस विभाग में 25 प्रतिशत व संपत्ति पंजीकरण संबंधी ऑफिस में 30 प्रतिशत  घटनाएँ सामने आई हैं।

    इस सर्वे को देश के 13 राज्यों में किया गया था। इस सर्वे में गुजरात, केरल, आंध्रा प्रदेश आदि कम भ्रष्ट व उत्तर प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडू जैसे राज्य अधिक भ्रष्ट साबित हुए हैं।

    इसके पहले जुलाई में ही कैबिनेट ने घूस को रोकने के लिए एक एक्ट को पास किया है। इसका नाम भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियन (संशोधन) 2018 है। इसके तहत घूस लेने व घूस देने वाले दोनों ही सजा के हकदार हैं।

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