रिलायंस जिओ से प्रतिस्पर्धा में वोडाफ़ोन द्वारा बटोरी गयी 25,000 करोड़ की पूँजी भी नहीं है पर्याप्त : रिपोर्ट

हाल ही की रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के शीर्ष प्रदाताओं में से एक वोडाफोन को अपने बिज़नस में अप्रैल तक 25000 करोड़ अतिरिके पूँजी के निवेश की आशा है। इतनी पूँजी यह विभिन्न कंपनियों में से अपनी हिस्सेदारी बेचकर जुटाएगा। इस पर कुछ विशेषज्ञों का कहना है की तेजी से वृद्धि करते जिओ से प्रतिस्पर्धा में और अपने घाटों की भरपाई करने में वोडाफोन को यह पूँजी भी कम पड सकती है।

वोडाफोन को सुधारना होगा ARPU :

फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट के अनुसार हालांकि वोडाफोन हाल ही में बटोरी गयी पूँजी से अपने घाटे की आपूर्ति कर लेगा लेकिन फिर भी यह बाज़ार में जिओ से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पायेगा। अपने आप को बाज़ार में स्थिर करने के लिए और वृद्धि करने के लिए वोडाफोन को अपना ARPU अर्थात औसत आय प्रति ग्राहक बढाने की सख्त ज़रुरत हैं अन्यथा यह घाटे में ही चलता रहेगा।

इसका एक और कारण यह है की जहां वोडाफोन अपने ग्राहक खोता जा रहा है, वहीँ जिओ के ग्राहक लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इतने अंतर को भरने में बहुत सारा समय और निवेश लगेगा जिसके चलते हाल ही में 25000 करोड़ की पूँजी भी कम पड़ने की आशंका है।

वोडाफ़ोन की अगली पांच तिमाही की ये है योजना :

अपनी अप्रैल तक जुटाई जाने वाली पूँजी के द्वारा वोडाफोन अगली पांच तिमाहियों में कुल 20000 करोड़ व्यय करने की योजना बना रहा है। वोडाफोन आइडिया को उम्मीद है कि अगली दो तिमाहियों में भी इसके न ग्राहकों की संख्या कम होने के पूरे आसार हैं क्योंकि इसने न्यूनतम रिचार्ज योजना जारी की है।

लेकिन अगली तिमाहियों में वोडाफोन विभिन्न योजनाओं में जमकर खर्च करने वाला है। इसको आशा है की इससे जिओ को टक्कर मिलेगी और उसका एकाधिकार सफल नहीं होगा।

वोडाफोन का आखिरी तिमाही का प्रदर्शन नहीं रहा ख़ास :

वोडाफोन ने हाल ही मिएँ अपने तीसरी तिमाही के परिणाम घोषित किये जिसके विश्लेषण से पता चला की यह भी जिओ से बहुत प्रभावित हुआ है। दुसरे सभी प्रदाताओं के मुकाबले इसकी आय प्रति ग्राहक सबसे कम रही है जोकि केवल 89 रूपए है।

इसके अलावा पिछली तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार वोडाफोन ने तिमाही में कुल 3.5 करोड़ ग्राहक खो दिए और इसके साथ साथ इसे कुल 5004 करोड़ का घाटा भी हुआ है। यदि वोडाफोन का प्रदर्शन और आय नहीं सुधरे तो यह दुसरे प्रदाताओं से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पायेगा।

विकास सिंह: विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.