Wed. Dec 7th, 2022

    भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत में, तेलंगाना के पालमपेट में 13वीं शताब्दी के रामप्पा मंदिर को रविवार को यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) घोषित किया गया। फ़ूज़ौ, चीन में विश्व विरासत समिति (डब्ल्यूएचसी) की चल रही ऑनलाइन बैठक में सर्वसम्मति के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि नॉर्वे ने मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल करने का विरोध किया, लेकिन रूस ने शाम 4.36 बजे मंदिर के तत्काल शामिल करने के प्रयास का नेतृत्व किया।

    इस कदम का समर्थन करने वाले 17 देशों के साथ आम सहमति ने मंदिर का सूची में शामिल होना सुनिश्चित किया।रामप्पा और काकतीय मंदिरों को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा देने के लिए नामांकन 2014 में किया गया था। यह स्थल 2020 में सूची में शामिल करने की गणना में थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण विश्व विरासत समिति (डब्ल्यूएचसी) की बैठक में देरी हुई।

    13 वीं शताब्दी में काकतीय राजा गणपतिदेव के एक सेनानायक रचेरला सेनापति रुद्रय्या ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर हैदराबाद से लगभग 220 किमी दूर पालमपेट में कटेेश्वरय्या और कामेश्वरय्या मंदिरों की ढह गई संरचनाओं से घिरा हुआ है।

    अपने उत्कृष्ट शिल्प कौशल और नाजुक संरचना कार्य के लिए जाना जाने वाला यह मंदिर अपने समय की तकनीकी जानकारी और सामग्री का एक असामान्य मिश्रण है। इसकी नींव “सैंडबॉक्स तकनीक” के साथ बनाई गई है, फर्श ग्रेनाइट की है और स्तंभ बेसाल्ट के हैं। मंदिर का निचला हिस्सा लाल बलुआ पत्थर का है जबकि सफेद गोपुरम को हल्की ईंटों से बनाया गया है जो कथित तौर पर पानी पर तैरती हैं।

    इससे पहले, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (आईसीओएमओएस) ने 2019 में एक प्रारंभिक दौरे के बाद साइट पर नौ कमियों का हवाला दिया था, लेकिन रविवार को अधिकांश देशों ने साइट के उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य के बारे में भारत के दृष्टिकोण समर्थन किया।

    नॉर्वे एकमात्र देश था जिसने आईसीओएमओएस के निष्कर्ष का हवाला देते हुए इस कदम का विरोध किया था। भारत ने अन्य देशों तक पहुंच कर रामप्पा मंदिर के लिए विश्व धरोहर स्थल का दर्जा सुनिश्चित करने के लिए एक उनके ऊपर कूटनीतिक दबाव स्थापित किया, जिन प्रतिनिधियों को प्रस्ताव पर मतदान करना था।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *