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    शत्रुघ्न सिन्हा को 25 हजार वोटों से हराया

    मुंबई सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को हुआ था। बॉलीवुड में काका के नाम से फेमस राजेश खन्ना यदि आज जिंदा होते तो अपना 75वां जन्मदिन मना रहे होते। कुल 180 फिल्मों तथा 163 फीचर फिल्मों में बेहतरीन भूमिका निभाने वाले राजेश खन्ना ने 1969-71 के बीच 15 सोलो हिट फिल्में दी।

    1976 के बाद सुपरस्टार राजेश खन्ना की फिल्में पीटने लगी थीं, दरअसल वो दौर शुरू हो चुका था मुंबई सिनेमा के शहंशाह अमिताभ बच्चन का। एंग्री यंगमैन के रूप में अमिताभ की फिल्में हर अभिनेता की फिल्मों पर भारी पड़ने लगी थी। बावजूद इसके करीब एक दशक राजेश खन्ना ने मुंबई पर्दे पर एकतरफा राज किया।

    1990 में राजेश खन्ना ने फिल्मों से संन्यास ले लिया। कहते हैं तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर राजेश खन्ना ने राजनीति ज्वाइन कर ली। हांलाकि राजीव गांधी के कहने पर वे कांग्रेस के लिए प्रचार पहले से करते रहे थे। राजेश खन्ना कांग्रेस पार्टी से कुछ चुनाव लड़े, जिसमें वो जीते भी और हारे भी।

    राजेश खन्ना 1991-1996 तक नई दिल्ली लोकसभा सीट से बतौर सांसद बने रहे। बाद में राजनीति से मोहभंग होने के चलते दोबारा राजनीति में कभी नहीं लौटे।

    राजेश खन्ना और राजीव गांधी

    ‘काका’ के सामने आडवाणी हारते-हारते बचे

    1991 का लोकसभा चुनाव जब आडवाणी ने गांधीनगर और नई दिल्ली लोकसभा सीट से पर्चा भरा। कांग्रेस ने राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी आडवाणी को हराने के लिए राजेश खन्ना को नई दिल्ली लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। तब कांग्रेस के रणनीतिकारों को भी यह आशा नहीं ​थी कि राजेश खन्ना इस चुनाव को इतना रोमाचंक बना देंगे।

    नई​ दिल्ली की सड़कें और गलियों में राजेश खन्ना का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा था। नई दिल्ली के युवाओं में राजेश की दीवानगी देखकर आडवाणी को लगा बाजी हाथ से निकल सकती है। इस लोकसभा चुनाव में आडवाणी को अपनी प्रतिष्ठा बचाने लिए चुनाव के अंतिम चार-पांच दिनों तक खुद इस लोकसभा क्षेत्र की गलियों घूमघूम कर जनसंपर्क करना पड़ा था।

    कहते हैं आडवाणी के सामने जनता में राजेश खन्ना की लोकप्रियता देखकर एकबारगी कांग्रेस के बड़े नेताओं के माथे पर पसीने छूटने लगे। इसके बाद शुरू हुआ राजेश को खन्ना को हराने के लिए कांग्रेस के अंदर भीतरघात का दौर। एक तरफ कांग्रेसी नेताओं की साजिशों से अनजान राजेश खन्ना चुनावी जनसंपर्क में जुटे रहे तो दूसरी तरफ भाजपा के रणनीतिकारों ने मतदाताओं को मन बदलने के लिए परंपरागत चुनावी हथकंडे अपनाए।

    लिहाजा राजेश खन्ना वो चुनाव हार गए। लेकिन कहतें हैं यादि उन्हें अपनी पार्टी के साथी नेताओं के भीतरघात का सामना नहीं करना पड़ा होता तो राजेश खन्ना चुनाव जीत जाते। आडवाणी यह चुनाव मात्र 1758 वोटों से जीते थे।

    राजेश खन्ना चुनाव प्रचार

    …जब ‘काका’ ने शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा को हराया

    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी आत्मकथा ‘ऐनीथिंग बट खामोश’में इस बात का खुलासा किया है कि 1992 के उप चुनाव में राजेश खन्ना के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती रही, इस बात का पछतावा मुझे आजीवन रहेगा।

    सिन्हा ने अपनी इस ​आत्मकथा में लिखा है कि मैंने अपनी इस गलती के लिए ना केवल कई बार उनसे माफी मांगी बल्कि अपना एक अच्छा मित्र भी खो दिया। बात उस दौर की है, जब आडवाणी ने नई दिल्ली लोकसभा सीट छोड़ दी और गांधीनगर से ही बतौर सांसद रहने का निर्णय लिया।

    राजेश खन्ना राजनीतिक सफर

    इस प्रकार नई दिल्ली लोकसभा सीट पर 1991 के बाद एक बार फिर उपचुनाव होना ही था। इसबार एक बार फिर राजेश खन्ना चुनाव मैदान में उतरे। लेकिन बीजेपी ने राजेश खन्ना को दोबारा हराने के लिए शॉटगन शत्रुघ्न पर अपना दांव खेला। लेकिन इस बार राजेश खन्ना ने शुत्रघ्न सिन्हा को पटकनी दे दी।

    कहते हैं राजेश खन्ना को हराने तथा शत्रुघन सिन्हा को हराने के लिए बीजेपी के दिग्ग्ज नेताओं कल्याण सिंह, शांता कुमार और मदन लाल खुराना ने ऐड़ी चोटी का जोर लगाया था लेकिन वो शत्रुघ्न सिन्हा को चुनाव नहीं जीता सके।

    खुद शत्रुघ्न सिन्हा के शब्दों में, राजेश से चुनाव हारने के बाद मैंने कभी सीधे तौर पर तो कभी इशारों में राजेश खन्ना से माफी मांगी थी। मैं अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत उपचुनाव लड़कर नहीं करना चाहता था, लेकिन अपने गुरू और गाइड लालकृष्ण आडवाणी को इनकार नहीं कर सका।

    पहला चुनाव हार जाना मेरी जिंदगी के कुछ सबसे अधिक निराशा वाले क्षण में से एक है। शत्रुघ्न सिन्हा कहते हैं ना उन्होंने केवल चुनाव हारा बल्कि हमेशा-हमेशा के लिए एक अच्छा मित्र भी खो दिया।

    राजेश खन्ना ने शत्रुघ्न सिन्हा को लगभग 25000 वोटों से हराया

    1992 के नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में राजेश खन्ना और शत्रुघ्न के बीच की चुनावी लड़ाई में डिंपल कपाड़िया और पूनम सिन्हा लोगों को अपने-अपने पति को वोट देने के लिए पूरी शिद्दत से प्रचार करती नजर आईं। लेकिन इस चुनाव का नजारा कुछ और ही था, आप को बता दें कि इस लोकसभा उपचुनाव में राजेश खन्ना तथा शुत्रघ्न सिन्हा के अलावा जनता दल से जयभगवान जाटव और निर्दलीय प्रत्याशी फूलन देवी भी अपनी किस्मत आजमा रही थी।

    जनता दल को इस बात का विश्वास था कि बाबरी मस्जिद ढहाने के दौरान पीवी नरसिम्हा राव ने हिंदूओं के प्रति जो नरम रूख अपनाया था, इसके लिए मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को नहीं बल्कि जनता दल को अपना वोट देंगे।

    उधर दस्यु सुंदरी फूलन देवी भी चुनाव मैदान में जनता के बीच आकषर्ण का केंद्र बनी हुई थी। इन सबके बीच नई दिल्ली की जनता ने राजेश खन्ना को चुनाव जीता दिया। राजेश खन्ना ने अपने प्रतिद्वंदी शत्रुघ्न सिन्हा को लभगभ 25000 हजार वोटों हराया। जबकि जयभगवान जाटव को मात्र दस हजार वोटों से ही संतोष करना पड़ा।

    चुनाव परिणाम
    राजेश खन्ना, विजेता, कांग्रेस पार्टी– कुल मत: 101,625
    शत्रुघ्न सिन्हा, भाजपा– कुल मत: 73,369
    जयभगवान जाटव, जनता दल, कुल मत: 10,638
    फूलन देवी, निर्दलीय, कुल मत: 753