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    पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी हत्याकांड में शामिल सभी सात आरोपियों को रिहा किए जाने का सुझाव तमिलनाडू राज्य कैबिनेट की ओर से राज्य के गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित को दिया गया हैं। तमिलनाडू सरकार चाहती हैं की, गवर्नर आर्टिकल 161 के तहत दीए गए आधिकारों का प्रयोग इस विषय में करे।

    तमिलनाडू सरकार की ओर से बयान तब आया हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से ए जी पेरारीवलन द्वारा दायर याचिका पर निर्णय लेने को कहा था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी हत्याकांड में दोषी पाए गए सात आरोपियों में से एक, ए जी पेरारीवलन भी हैं।

    राज्यमें सत्ताधारी एआईए डीएमके द्वारा मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी की अध्यक्षता में किए गए बैठक में राज्य कैबिनेट ने इस विषय में रेसोल्यूशन भी पास किया हैं। इसकी जानकारी मीडिया को राज्य के मत्स्योद्योग मंत्री डी जयकुमार ने दी।

    जयकुमार ने कहा, “रेसोल्यूशन की एक कॉपी राज्यपाल को सोंपी जाएगी।”

    “कैबिनेट ने राज्य के गवर्नर पिरोहित से विनती की हैं की, वे संविधान के आर्टिकल 161 में दीए गए अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर मुरुगन, संथन, ए जी पेरारीवलन, नलिनी, रोबेर पिओउस, रविचंद्रन और जयकुमार को रिहा करने का आदेश दें।”

    “महामहिम राज्यपाल, कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले को सहमती देने के लिए बाध्य हैं।”

    भारतीय संविधान का आर्टिकल 161, राष्ट्रपति के अनुरूप राज्य के राज्यपालों को भी विशेष आधिकार प्रदान करता हैं। इस आधिकार का उपयोग कर राज्य के गवर्नर, कोर्ट द्वारा दोषी माने गए व्यक्ति को क्षमा कर सकते हैं।

    2014 में राज्य की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता के अध्यक्षता में किए गयी बैठक में भी राजीव गांधी हत्याकांड में पिछले 27 साल से जेल में सजा काट रहे आरोपियों को रिहा किए जाने की मांग कि गयी थी। जिसे केंद्र सरकार द्वारा ठुकरा दिया गया था।

    मंत्री डी जयकुमार कहा, “क्योंकि आर्टिकल 161 राज्य के अधीन हैं इस लिए हमें विश्वास हैं की गवर्नर भी कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले का समर्थन करेंगे।”

    By प्रशांत पंद्री

    प्रशांत, पुणे विश्वविद्यालय में बीबीए(कंप्यूटर एप्लीकेशन्स) के तृतीय वर्ष के छात्र हैं। वे अन्तर्राष्ट्रीय राजनीती, रक्षा और प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज में रूचि रखते हैं।

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