सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

यूपी निकाय चुनाव में बुर्का हटा पहचान सुनिश्चित करने पर महिलाओ का विरोध

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उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में मुस्लिम महिलाओ के बुर्का हटा कर पहचान सुनिश्चित करने पर मुस्लिम महिलाओ ने इसका विरोध किया है। मुगलसराय, बागपत, चंदौली और सहारनपुर में वोट देने आई मुस्लिम महिलाओ का वोटर कार्ड और चेहरा देखने के बाद ही उन्हें वोट देने की इजाजत दी गई। इसपर महिलाओ ने विरोध करना शुरू कर दिया।

सबसे पहले इस कार्य की मांग उत्तर प्रदेश बीजेपी ने की थी, बाकायदा राज्य सरकार को एक ज्ञापन के जरिये यह मांग की गई थी कि कोई भी महिला बुर्का या घूँघट में आये तो उसकी पहचान वोटर कार्ड से की जाये। इस कार्य के लिए महिला सुरक्षा की खास व्यवस्था की जाये। हालाँकि चुनाव आयोग ने इस बात को तवज्जो नहीं दी, लेकिन कुछ जिलों में प्रशासन ने इसे लागु कर दिया। मुगलसराय, चंदौली, बागपत और सहारनपुर में वोटिंग के दौरान यह देखन इ को मिला की महिला सुरक्षाकर्मी बुर्के में आई और मतदान करने आई महिलाओ का बुर्का हटा कर वोटर कार्ड से उनकी चेहरे की मिलान की।

नगर निकाय चुनाव के अंतिम चरण में 26 जिलों में नगर निगम नगर पालिका और नगर पंचायतों के लिए मतदान हो रहा है। मतदान को सकुशल संपन्न कराने के लिए एक तरफ जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं वही फर्जी वोट को रोकने के लिए भी चुनाव आयोग द्वारा इंतजाम किए गए हैं। वहीं मुगलसराय में मतदान के दौरान मुस्लिम महिलाओ का बुर्का हटाकर वोटर कार्ड से उनकी पहचान की गई। इसके लिए प्रशासन ने महिला कांस्टेबल को नियुक्त किया था। लेकिन इस कार्यवाही पर मुस्लिम महिलाओ में नाराजगी देखि गई।

मुगलसराय बूथ पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मी शैली कुमारी ने बताया कि हमें आदेश है कि, जो भी महिलाये बुर्के आये उनकी वोटर कार्ड से पहचान की जाये। लेकिन बुर्का पहन कर आई मुस्लिम महिलाय इससे नाराज दिखी। उनका कहना था कि इससे पहले भी हम बुर्के में वोट देने आते थे लेकिन ऐसी कवायदे कभी नहीं देखि।

रूमी परवीन, ने कहा कि हमलोग पहले भी वोट दे चुके है। लेकिन ऐसा बर्ताव हमारे साथ कभी नहीं हुआ कि बुर्का हटाकर चेहरा देखा फिर वोट देने की इजाजत दी जाये। कुछ इसी तरह के विचार मतदान करने आई नाजिया के भी थे। नाजिया का कहना था कि अगर ऐसा करने का आदेश पहले से ही था तो इसके लिए एक अलग जगह स्थापित करनी चाहिए थी। जो बुर्का बाहर हटाया जा रहा है उसे अंदर भी हटा कर देख सकते है। वहीं सलमा ने कहा कि यह इस्लाम के खिलाफ है। अगर यह कवायद फर्जी वोट रोकने के लिए किया जा रहा है तो हमारे पास वोटर कार्ड है। जिसके जरिए हम वोट देने आये है।

सहारनपुर में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा जब बड़ी तादाद में लाइनों में लगी बुर्का पहने औरतें वोटिंग के पहले बुर्का हटाकर अपनी पहचान सुनिश्चित कराती दिखीं। सहारनपुर में बुर्कानशीं औरतें भी बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचीं। पोलिंग बूथ के अंदर उनकी पहचान के लिए उनके मुंह से बुर्का और कपड़ा हटवाकर उनकी पहचान सुनिश्चित की गई। इसके बाद ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकीं।

बता दे कि चाहे मुगलसराय, बागपत, या सहारनपुर हो सभी जगहों पर मुस्लिम महिलाओ ने इस कवायद का विरोध किया। लेकिन प्रशासन ने अपने आगे इनकी एक न चलने दी। महिला सुरक्षाकर्मियों के चेहरा और वोटर कार्ड मिलान करने के बाद ही महिलाओ को मतदान के लिए जाने दिया गया।

आपको बता दे कि बीजेपी ने पहली बार इसकी मांग की थी और पार्टी में शामिल मुस्लिम नेताओ ने भी इसका समर्थन किया था। योगी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा पहले ही कह चुके है कि अगर पासपोर्ट और आधार के लिए चेहरा दिखाया जा सकता है तो फिर मतदान के समय क्यों नहीं।

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