दा इंडियन वायर » टैकनोलजी » यूडीपी और टीसीपी प्रोटोकॉल में अंतर
टैकनोलजी

यूडीपी और टीसीपी प्रोटोकॉल में अंतर

udp and tcp in hindi, difference

यूडीपी और टीसीपी प्रोटोकॉल (udp and tcp protocol)

दो तरह के इंटरनेट प्रोटोकॉल हम इस्तेमाल करते हैं वह हैं टीसीपी और यूडीपी। टीसीपी कनैक्शन पर निर्भर करता है इसका कनैक्शन होते ही हम दोनों तरफ डाटा का आदान प्रदान कर सकते हैं।

यूडीपी बिना कनैक्शन के जुडने वाला इंटरनेट प्रोटोकॉल है। काफी तरह के संदेश हम इसकी मदद से पैकेट के द्वारा भेज सकते हैं। टीसीपी ज्यादा सही से काम करता है क्योंकि इसकी मदद से डाटा को आसानी से एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुंचाया जा सकता है।

टीसीपी में यह भी फायदा होता है की इसमे किसी भी प्रकार का डाटा खोता नहीं है जिस प्रकार का डाटा हमने भेजा है, उसी तरह का डाटा उपयोगकर्ता तक बिना किसी परेशानी के पहुँच जाता है। टीसीपी के ट्रंजमिशन का जो डाटा होता है वह काफी सक्षम तरीके से उपयोगी तक पहुंचता है।

यूडीपी को 1980 में बनाया गया था और यह काफी पुराना नेटवर्क प्रोटोकॉल है। यह एक सामान्य नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो की ओएसआई ट्रांसपोर्ट परत पर आईपी की मदद से काम करता है। यह टीसीपी के तुलना में एक अविश्वसनीय प्रोटोकॉल है।

पर यह सच है डाटा ट्रंजमिशन में यह किसी भी तरह की परेशानी नहीं देता। यूडीपी विडियो कॉन्फ्रेंस और कम्प्युटर गेम में काफी ज्यादा काम आता है। यह बैंडविड्थ के होने वाले नुकसान से भी हमें बचाने का काम करता है।

क्या यूडीपी टीसीपी से बेहतर है? (Is ucp better than tcp?)

इसका उत्तर हर विकल्प में अलग अलग हो सकता है क्योंकि यूडीपी की क्षमता काफी अच्छी होती है पर इसकी गुणवत्ता टीसीपी से थोड़ी कम है। इस अंतर को हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं।

जब भी कोई एप अच्छा प्रदर्शन करता है जैसे की ऑनलाइन गेम, विडियो चैट आदि में जब हम इन्हे देखते है और इस्तेमाल करते हैं’ तो वह यूडीपी की वजह से ही अच्छा प्रदर्शन दे पाते हैं।

ऑनलाइन गेम में अगर किसी समय गेम खेलते खेलते कनैक्शन चला भी जाए तो यूडीपी की वजह से यह कुछ समय तक वैसे ही चलता रहता है। यदि किसी समय कुछ पैकेट खराब भी हो जाते हैं तो इससे इसकी क्षमता पर ज्यादा कुछ फरक नहीं पड़ता। अगर कनैक्शन में काफी दिक्कतें आती हैं तब ही इसमे थोड़ा समय लगता है उस प्रोग्राम को चलाने के लिए।

यूडीपी तब ज्यादा उपयोगी नहीं होता जब हमे फाइल को भेजना होता है उसके लिए आपको किसी पैकेट की जरूरत नहीं पड़ेगी किसी गेम को चलाने के लिए क्यूंकी यह कोई गेम नहीं है।

यूडीपी और टीसीपी में अंतर (difference between udp and tcp protocol in hindi)

टीसीपीयूडीपी
·         इसे हम ट्रंजमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल बोलते हैं।·         इसे हम यूजर डाटाग्राम प्रोटोकॉल या फिर यूनिवरसल डाटाग्राम प्रोटोकॉल बोल सकते हैं।
·         यह कनैक्शन पर निर्भर करता है।·         यह कनैक्शन पर निर्भर नहीं करता।
·         यह संदेश की तरह इंटरनेट पर कनैक्शन के माध्यम से एक कम्प्युटर से दूसरे कम्प्युटर को काफी आसानी से जोड़ देता है।·         यह एक तरह का प्रोटोकॉल है जो की संदेश को भेजने के काम में आता है। यह कनैक्शन पर निर्भर नहीं करता जिसका मतलब यह है की एक प्रोग्राम काफी सारे डाटा को पैकेट की मदद से भेज सकता है।
·         टीसीपी उन एप्स में काम आता है जिनमे उच्च तरह की विश्वसनीयता की जरूरत होती है और जिनमे ट्रंजमिशन का समय कम होता है।·         यूडीपी उन एप्स में काम आता है जिनमे की वह तेज गति से चले और उसमे उच्च दर्जे वाला ट्रंजमिशन समय हो जैसे की गेम। यूडीपी का स्टेटलेस व्यवहार सर्वर के लिए काफी उपयोगी होता है। क्योंकि यह उपयोगकर्ता की छोटी से छोटी परेशानी को आसानी से सही कर देता है।
·         यह एचटीटीपी, एचटीटीपीएस, एफ़टीपी, एसएमटीपी, टेलनेट आदि प्रोटोकॉल में इस्तेमाल होता है।·         यह डीएनएस, डीएचसीपी, टीएफ़टीपी, एसएनएमपी, रिप, वीओआईपी आदि प्रोटोकॉल में इस्तेमाल होता है।
·         टीसीपी डाटा पैकेटस को सही से एक कतार में लगाता है।·         यूडीपी थोड़ा तेज होता है क्योंकि इसमे किसी भी तरह की रुकावट नहीं आती और यह एक तरह से सक्षम और उच्च प्रोटोकॉल माना जाता है।
·         इसमे यह निश्चित किया जाता है की जिस कतार में डाटा को भेजा गया है उस ही कतार में डाटा दूसरे सिस्टम तक जाता है।·         इसमे किसी प्रकार की ज़िम्मेदारी नहीं होती की भेजा हुआ संदेश पहुंचेगा या नहीं।
·         टीसीपी के हैडर का आकार 20 बाइट का होता है।·         यूडीपी के हैडर का आकार 8 बाइट का होता है।
·         इसमे कुछ हैडर फील्ड होते हैं जैसे की सोर्स पोर्ट, डेस्टिनेशन पोर्ट, चैकसम।·         इसके हैडर फील्ड होते हैं सोर्स पोर्ट, डेस्टिनेशन पोर्ट, चैक सम।
·         डाटा को बाइट स्ट्रीम के रूप में समझा जाता है और किसी भी तरह के सिग्नल को संदेश के रूप में समझा जाता है।·         पैकेटस अलग अलग भेजे जाते हैं और उसको देखा और समझा जाता है। पैकेटस की एक सीमा होती है जिससे की सही से काम में लिया जाता है।
·         टीसीपी थोड़ा भारी होता है। टीसीपी के सेटअप में तीन पैकेट की जरूरत पड़ती है सॉकेट में उसे जोड़ने के लिए इससे पहले की किसी तरह का डाटा किसी उपयोगी द्वारा भेजा जाए। टीसीपी हर तरह से डाटा को कंट्रोल करने के काम में आता है।·         यूडीपी थोड़े हल्के होते हैं। इसमे संदेश की कोई कतार नहीं होती और ना ही किसी तरह के कनैक्शन को ट्रैक किया जाता है। यह आईपी पर बनाई गई ट्रांसपोर्ट परत के रूप में काम करती है।
·         इसमे पावती का भी एक विकल्प होता है।·         इसमे पावती का कोई विकल्प नहीं होता।
·         इसमे काफी तरह के फील्ड होते है जैसे की – कतार का नंबर, एसीके नंबर, डाटा ऑफसेट, रिज़र्व्ड, कंट्रोल बिट, विंडो, अर्जेंट पॉइंटर, ऑप्शनस, पैडिंग, चैक सम, सोर्स पोर्ट, डेस्टिनेशन पोर्ट।·         इसमे भी काफी तरह के फील्ड होते हैं जैसे की लंबाई, सोर्स पोर्ट, चैक सम डेस्टिनेशन पोर्ट आदि।
·         टीसीपी में एरर की जाँच की जाती है और उसकी रिकवरी भी की जाती है। एरोनेऔस पैकेटस को दुबारा अपने गंतव्य पर आसानी से भेजा जा सकता है।·         यूडीपी भी एरर की जाँच करता है पर यह एरोनेऔस पैकेटस को सीधा हटा देता है। पर इसमे एरर की रिकवरी नहीं हो पाती।
·         टीसीपी में फलो कंट्रोल होता है। इसके लिए सॉकेट में तीन पैकेट की हमें जरूरत पड़ती है किसी भी तरह को डाटा को भेजे जाने से पहले। टीसीपी इस मामले में बड़े ही समझदारी से काम करता है।·         यूडीपी में फलो कंट्रोल का कोई विकल्प नहीं होता।

 

इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो उसे आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

About the author

अभिषेक विजय

1 Comment

Click here to post a comment

  • TCO or UDP in dono protocols me se behtar protocol konsaa hota hai and kis tarah accha hota h yah




फेसबुक पर दा इंडियन वायर से जुड़िये!