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यूजर इंटरफेस क्या है? परिभाषा, प्रकार

यूजर इंटरफेस user interface in hindi

यूजर इंटरफेस क्या है? (user interface definition in hindi)

यूजर इंटरफ़ेस और मनुष्य की मशीन का इंटरफ़ेस एक ही बात है। यह एक मशीन का अंग होता है जो की लोगों के द्वारा मशीन चलाने में काम आता है।

स्विच, रबर के कीपैड और टच स्क्रीन यह सभी यूजर इंटरफ़ेस के उदाहरण हैं जिनहे हम देख और छू सकते हैं। कुछ मशीनों में यह यूजर इंटरफ़ेस पूरा का पूरा कम्प्युटर से चलने वाला होता है।

हम इस तरह के सिस्टम को ह्यूमन कम्प्युटर इंटरफ़ेस भी बोलते हैं। इस सिस्टम में हम पूरा काम सॉफ्टवेयर की मदद से करते हैं और हो रहे कामों का ध्यान रखते हैं।

ह्यूमन मशीन इंटरफ़ेस मशीन की इंजीन्यरिंग को हम एर्गोनोमिक्स की मदद से बढ़ा सकते हैं। इसके कुछ प्रमुख तत्व भी हैं जैसे की यूई (Usability engineering) और एचएफ़ई (Human factors engineering)।

जो टूल हम इसमे इस्तेमाल करते हैं वह कम्प्युटर साइन्स पर पूरी तरह निर्भर करते हैं वह है कम्प्युटर ग्राफिकस, ऑपरेटिंग सिस्टम (operating system), प्रोग्राममिंग भाषा आदि।

आजकल के समय में हम कम्प्युटर से ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस इस्तेमाल करते हैं ह्यूमन मशीन इंटरफ़ेस के लिए क्योंकि आजकल सभी उपकरण काफी ग्राफिकस इस्तेमाल करते हैं।

यूजर इंटरफेस का अतीत (history of user interface in hindi)

  • 1945 से 1968 बैच इंटरफ़ेस – इस समय कम्प्युटर की शक्ति काफी कम थी और यह काफी महंगे भी हुआ करते थे। उपयोगकर्ता को कम्प्युटर ही काफी महंगा पड़ता था इस वजह से उस समय यूजर इंटरफ़ेस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। सॉफ्टवेयर को इस तरह रखा जाता था जिससे की वह प्रॉसेसर को सही से इस्तेमाल कर सके। यूजर इंटरफ़ेस की इनपुट साइड जो होती है वह पंच कार्ड की होती है और एक तरह से उसे हम पेपर टेप भी बोल सकते हैं।
  • 1969 से अब तक कमांड लाइन यूजर इंटरफ़ेस – कमांड लाइन यूजर इंटरफ़ेस में बैच मॉनिटर को सिस्टम कोन्सोल से जोड़ा जाता है। यह ट्रैंज़ैक्शन रेसपोनस देने का काम करता है जिससे की हमें जल्दी से परिणाम मिल सकें। इसमे जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाते हैं वह भी काफी अच्छी तरह के होते हैं जिससे की हमें काम करने में आसानी होती है।

यूजर इंटरफेस का डिजाईन (user interface design in hindi)

प्राथमिक तौर पर जो विधि इंटरफ़ेस डिज़ाइन में इस्तेमाल की जाती है वह है प्रोटोटाइपिंग और सिमुलेशन।

ज़्यादातर जो ह्यूमन मशीन इंटरफ़ेस डिज़ाइन में कुछ चरण होते हैं वह हैं – इंटरेकशन स्पेसीफिकेशन, इंटरफ़ेस सॉफ्टवेयर स्पेसीफिकेशन, और प्रोटोटाइपिंग।

यूजर इंटरफेस के प्रकार (types of user interface in hindi)

  • अल्टरनेटिव यूजर इंटरफ़ेस – यह उपयोगकर्ता के ध्यान को केंद्रित करने का काम करता है और किस समय पर संदेश और वार्निंग देनी है उसका ध्यान रखता है।
  • बैच इंटरफ़ेस – इसमे यूजर बैच प्रोसेसिंग का काम करता है और आउटपुट लेता है जिससे की सारी प्रोसेसिंग की जाए। प्रोसेसिंग चालू होने के बाद कम्प्युटर इस कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डालता।
  • कमांड लाइन इंटरफ़ेस – इसमे हमें कम्प्युटर के कीबोर्ड की मदद से कमांड स्ट्रिंग लिखना पड़ता है और कम्प्युटर मॉनिटर में आउटपुट को दिखाने का काम करता है। यह प्रोग्रामर और इंजीन्यरिंग एवं विज्ञान के विद्यार्थियों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
  • क्रोससिंग बेस्ड इंटरफ़ेस – यह ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस होता है जिसका प्राथमिक काम सीमाओं को उलांघना होता है और अच्छे से सक्षम रूप से काम करना होता है।
  • डाइरैक्ट मेनिपुलेशन इंटरफ़ेस – यह एक तरह का सामान्य यूजर इंटरफ़ेस होता है जो की उपयोग को वस्तुओं को मेनिपुलेट करने में मदद करता है जिससे के लोग प्रभावी रूप से काम कर सकें।
  • जेस्टर इंटरफ़ेस – इसमे यह हाथ और माऊस को घूमाने से या हिलाने से कार्य करता है और इसको करने के लिए हमें हाथ और माऊस से इसको दिशा निर्देश देने पड़ते हैं।
  • हार्डवेयर यूजर इंटरफ़ेस – यह उन उत्पादों में काम आते हैं जिनहे हम ज़्यादातर रोजाना इस्तेमाल करते हैं जैसे की टोस्टर, कार का डेश्बोर्ड आदि। यह क्नोब, स्लाइडर, स्विच, टचस्क्रीन और बटन की मदद से बनते हैं। 

इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

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अभिषेक विजय

1 Comment

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  • अपपके द्वारा डी गए जानकारी मुझे बहुत अच्छी लागि धन्यबाद

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