बुधवार, जनवरी 22, 2020

यूएनजीए सत्र के दौरान पाक में एक लड़की का जबरन हुआ धर्मांतरण , सिन्धी फाउंडेशन ने करेगा प्रदर्शन

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

अमेरिकी स्थित सिन्धी संगठन ने हिन्दू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के खिलाफ 26 सितम्बर को न्यूयोर्क में आगामी  संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान प्रदर्शन की योजना बनायीं है। पाकिस्तान में हिन्दू लडकियों के जबरन धर्मांतरण के मामले को सिन्धी फाउंडेशन ने जोर देकर उठाया है। वे सेवसिन्धीगर्ल  के बैनर के तले प्रदर्शन का आयोजन करेंगे। संस्था ने बताया कि देश में जबरन धर्मांतरण के मामले में काफी वृद्धि हुई है।

हर साल 12 से 28 वर्ष की 1000 सिन्धी हिन्दू लडकियों का अपरहण होता है, उनका धर्मांतरण कर मुस्लिमो से निकाह कर दिया जाता है। पाकिस्तानी मानव अधिकार परिषद् की जनवरी 2004 से मई 2018 तक की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में सिन्धी लडकियों के अपहरण के 7430 मामले दर्ज है। हर महीने 40 से 60 लडकियों का धर्मांतरण कर दिया जाता है।

हालाँकि असल आंकड़े इससे कई ज्यादा है।  पाकिस्तानी मानव अधिकार परिषद् के मुताबिक, जो परिवार अपनी बेटी के गायब होने की शिकायत दर्ज कराते हैं पुलिस उन्हें नजरअंदाज करती है और उनकी एफआईआर कभी जमा नहीं की जाती है। इसलिए लडकिया अपने अपहरणकर्ताओं के साथ चली जाती है जहां उन्हें उनके परिवार को मरने या उन्हें चोट पंहुचाने की धमकी देकर चुप रखा जाता है।

यूएनजीए की मुलाकात के दौरान इमरान खान भी सत्र को संबोधित करेंगे। फाउंडेशन ने कहा कि “युवा लडकियों के जबरन धर्मांतरण में कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों और सेना से जुड़े लोगो की शह होती है। एक धार्मिक नेता और राजनेता मियां मिठो उन नामो में शुमार है। उसका सेना और इमरान खान के सतह काफी करीबी सम्बन्ध है और इसकी अनुमति वाही देता है।

इस्लामाबाद अपने मुल्क में धार्मिक अल्पसंख्यको के साथ भेदभाव का रवैया रखता है इसमें हिंसा, हत्या, अपहरण, बलात्कार, इस्लाम में जबरन धर्मांतरण शामिल है। पाकिस्तानी हिन्दू, सिख, ईसाई, अहमदिया और शिया सबसे ज्यादा जुल्म झेलने वाला समुदाय है।

बीते महीने ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा ने चीन और पाकिस्तान द्वारा धार्मिक आज़ादी को कुचलने के मामले को उठाया था। धार्मिक अल्पसंख्यको की सुरक्षा पर मुलाकात में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने दोनों देशो में बढ़ी धार्मिक पाबंदियो पर चिंता जाहिर की थी।

उन्होंने चीन में उइगर मुस्लिमो और पाकिस्तान में हिन्दुओं, अहमदिया और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय पर अत्याचार को रेखांकित किया था।

 

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