यमन से बाहर निकलने के लिए अमेरिका को सऊदी अरब की मदद करनी चाहिए: अध्ययन

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यमन की विध्वंशक जंग से बाहर निकलने के लिए सऊदी अरब कई मार्गो की तलाश कर रहा है और उसके सहयोगी ब्रिटेन और अमेरिका इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निव्हा सकते हैं। रविवार को इंटरनेशनल क्राइसेस ग्रुप ने यह जानकारी दी है।

जंग के अंत में अमेरिका की भागीदारी

इस समूह ने कहा कि “अमेरिका को एक विशेष राजदूत की नियुक्ति करनी चाहिए और चार सालो से जारी जंग खत्म होने के बाद हथियारों को भेजने के वादे के साथ हथियारों के निर्यात को रोक देना चाहिए। यमन के अधिकतर भागो पर हूथी विद्रोहियों का कब्ज़ा है जिसके खिलाफ सऊदी ने मोर्चा खोल रखा है।

इस समूह ने पूर्व और मौजूदा अमेरिका और अन्य देशों के अधिकारीयों के इंटरव्यू के अध्ययन के आधार पर कहा कि “सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन को राष्ट्रीय विजय कैसे हासिल करने के बाबत विचार करना रोकने की जरुरत है। बेहद कम समय में हूथी विद्रोही अपनी सहूलियत से अधिक ताकतवर हुए हैं। यमन से बाहर निकलने के लिए अमेरिका को ढूंढने का नेतृत्व करना चाहिए।”

समाधान ढूंढें अमेरिका

हाल ही में अमेरिकी काँग्रेस ने यमन में जनहानि और भुखमरी के बढ़ते स्तर पर चेतावनी जारी की थी। साथ ही अमेरिका को तुरंत यमन में सऊदी गठबंधन से बाहर निकलने के लिए विधेयक पारित किया था इसके आलावा पत्रकार जमाल खशोगी की सऊदी अरब द्वारा हत्या ली भी निंदा की थी।

सऊदी अरब के करीबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बिल पर वीटो का इस्तेमाल नहीं किया था लेकिन अभी यह मसौदा लंबित है। यमन की जंग के मुखर आलोचक डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि “अगर डोनाल्ड ट्रम्प वीटो का इस्तेमाल करते हैं तो कांग्रेस सऊदी अरब को बदलाव के लिए बुरा झटका दे सकती है।”

उन्होंने कहा कि “यमन के भविष्य की सरकार में हूथी विद्रोहियों की एक ठोस और सार्थक भूमिका होगी। अब निर्णय करना है कि सऊदी कैसे यमन से बाहर आएगा जो देश के लम्बे समय के सुरक्षा हितों के लिए खतरा न हो।” डोनाल्ड ट्रम्प सऊदी अरब के साथ है क्योंकि वह प्रतिद्वंदी ईरान की जीत को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। ईरान विद्रोहियों को समर्थन करता है क्योंकि वह धार्मिक रूप से तेहरान की शिया सरकार से जुड़े हुए हैं।

इस समूह के प्रमुख रोबर्ट मलय ने कहा कि “मेरे ख्याल से वह इसका अंत करना चाहते हैं लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि इसे कैसे करना है। सऊदी विचार कर रहा है कि थोड़ी अधिक सैन्य ताकत से हूथी विद्रोही टूट जायेंगे और इसके बाद वह जंग का अंत कर देंगे और ईरान बैकफुट पर होगा। लेकिन इसे नामंज़ूर करने के लिए चार साल सबूत के तौर पर है।”

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