सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

हमें कसूरवार ठहराकर यमन की जंग को खत्म नहीं कर सकते: ईरानी विदेश मन्त्री

Must Read

डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे की तैयारियां भारतियों की ‘गुलाम मानसिकता’ को दर्शाता है: शिवसेना

शिवसेना (Shivsena) ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की बहुप्रतीक्षित यात्रा की चल रही...

“अरविंद केजरीवाल को कभी आतंकवादी नहीं कहा”: प्रकाश जावड़ेकर

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने शुक्रवार को इस बात से इनकार किया कि उन्होंने कभी दिल्ली के...

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नें नागरिकता क़ानून के खिलाफ विरोध में लिया भाग

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शुक्रवार को मांग की कि केंद्र देश में शांति और सद्भाव...
कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

ईरान के विदेश मन्त्री जावेद जरीफ ने रविवार को अमेरिका की निंदा की क्योंकि वह सऊदी के तेल उत्पादक सेक्टर में हमले के लिए तेहरान को कसूरवार ठहरा रहा है। उन्होंने कहा कि “सबके लिए ईरान को जिम्मेवार ठहराकर अमेरिका यमन में संघर्ष को खत्म करने में असक्षम है।”

सऊदी पर हमले के पीछे ईरान

जावेद जरीफ ने ट्वीट कर कहा कि “अधिकतम दबाव की नीति में नाकाम होकर, सचिव पोम्पियो ने इसे अधिकतम छल में परिवर्तित कर दिया है। अमेरिकी सहयोगी यमन की जंग में इस कल्पना के कारण फंसे हुए हैं कि हथियार सर्वोच्चता से सैन्य जीत हासिल की जा सकती है। ईरान पर आरोप लगाकर इस आपदा से नहीं बचा जा सकता है। शायद अप्रैल 2015 के हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करके और वार्ता शुरू कर यह संभव है।”

ईरान के विदेश मन्त्री ने अमेरिका के राज्य सचिव माइक पोम्पियो के बयान को ख़ारिज कर दिया था। पोम्पियो ने सऊदी पर हुए ड्रोन हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का आरोप लगाया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक अब्बास मौसावी ने कहा कि “अमेरिका की अधिकतम दबाव की नीति नाकाम होने के कारण अब अधिकतर झूठो में परिवर्तित हो गयी है।” सऊदी की दो तेल उत्पादन इलाकों में शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया था। यमन के हौथी विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

सऊदी अरामको राज्य द्वारा संचालित और नियंत्रित कंपनी है, इसके अधिकतर भाग पर सल्तनत के रिफाइनरी प्रोडक्शन और आयलफील्ड का अधिकार है। रेवेन्यू के मामले में यह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और विश्व की सबसे अधिक मुनाफा देने वाली कंपनी है।

पश्चिम समर्थित सुन्नी मुस्लिम गठबंधन सऊदी अरब और यूसी ने यमन में साल 2015 में दखल दिया था।, ताकि अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन की सरकार को वापस सत्ता पर बैठाया जा सके। हौथी विद्रोहियों का देश के अधिकतर भागो पर नियंत्रण है।

 

- Advertisement -

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे की तैयारियां भारतियों की ‘गुलाम मानसिकता’ को दर्शाता है: शिवसेना

शिवसेना (Shivsena) ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की बहुप्रतीक्षित यात्रा की चल रही...

“अरविंद केजरीवाल को कभी आतंकवादी नहीं कहा”: प्रकाश जावड़ेकर

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने शुक्रवार को इस बात से इनकार किया कि उन्होंने कभी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal)...

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नें नागरिकता क़ानून के खिलाफ विरोध में लिया भाग

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शुक्रवार को मांग की कि केंद्र देश में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए संशोधित...

जम्मू कश्मीर मामले में भारत का तुर्की को जवाब; ‘आंतरिक मामलों में दखल ना दें’

भारत ने शुक्रवार को अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान जम्मू और कश्मीर पर तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन की टिप्पणियों का जवाब दिया...

शाहीन बाग़ के लोगों ने वैलेंटाइन डे पर प्रधानमंत्री मोदी को दिया न्योता

शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रवार को उनके साथ वेलेंटाइन डे मनाने और आने का निमंत्रण...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -