Sat. Nov 26th, 2022
    म्यांमार बांग्लादेश

    पूरी दुनिया में म्यांमार से निकाले गए रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा छाया हुआ है। लाखो की संख्या में घर से बेघर हुए रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार की सरकार ने जमकर अत्याचार किए है। जिस वजह से बड़ी संख्या में इन्हें पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है। भारत में भी इस मुद्दे को लेकर काफी बवाल हुआ था।

    हाल ही में अब संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुसलमान मुद्दे पर नया बयान जारी करके म्यांमार पर दबाव बनाने की कोशिश करी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्यांमार से रखाइन प्रांत में अपनी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने और हिंसा के कारण बेघर हुए लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को घर वापस लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है।

    6 लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश में लेनी पड़ी शरण

    रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार द्वारा किए गए हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने चीन द्वारा समर्थित एक सर्वसम्मत बयान में अपनी सहमति दी है। इस बयान में कहा गया है कि म्यांमार सरकार की कार्रवाई की वजह से करीब 6 लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को सीमा पार करके बांग्लादेश जाने को मजबूर होना पड़ा है।

    इसके लिए अब संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार को कहा है कि वह अपने नागरिकों को तुरंत वापिस बुलाए और रोहिंग्या मुसलमानों को घर वापस लौटने की अनुमति प्रदान करे।

    इतना ही नहीं परिषद ने म्यामार सुरक्षा बलों सहित अन्य लोगों द्वारा रोहिंग्या समुदाय के लोगों को मार डालने, यौन उत्पीड़न करने और उनके घरों एवं संपत्ति को आग के हवाले करने सहित मानवाधिकार के उल्लंघनों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार द्वारा की गई इस कार्यवाही को जातीय सफाया करार दिया है।

    संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार पर दबाव बनाते हुए वहां की सरकार को चेताया है कि अब रखाइन प्रांत में सेना का गलत तरीके से अत्यधिक इस्तेमाल न किया जाए। जारी बयान में कहा गया है कि म्यांमार अपने देश में शांति व्यवस्था को बनाए रखे।

    साथ ही मांग की है कि रखाइन प्रांत में मानवीय सहायता कर्मियों को वहां पर जाने की अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। गौरतलब है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचारों का मुद्दा बड़े स्तर पर पूरी दुनिया में उठाया गया था।