Wed. Dec 7th, 2022

    रोहिंग्या मुस्लिमो पर म्यांमार में हो रहे अत्याचारो से पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है। रोहिंग्या मुसलमानो की हालत म्यांमार में काफी भयावह है। अपने ही देश में रोहिंग्या मुस्लिम बेगाने हो चुके है, और उन्हें कोई देश अपनाने को तैयार नहीं है। भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे है, जिन्हे अब देश से निकालने की आवाज उठ रही है। भारत में मुस्लिम धर्मगुरुओं और रहनुमाओ ने म्यांमार में हो रही इस भयावह घटना पर दुःख जाहिर किया है।

    इमाम बुखारी ने इसे इंसानियत को शर्मशार करने वाला बताया

    दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि म्यांमार में जो रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे है वह इंसानियत को शर्मशार करने वाला है। मोदी सरकार से हम उम्मीद करते है, कि इंसानी हमदर्दी के तहत म्यांमार पर दबाव बनाया जाए। ताकि हिंसा और कत्लेआम रुक सके। हिन्दुस्तान सदियों से परेशान लोगों की मदद करता है, ऐसे में सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए और अपनी परंपरा का निर्वहन करना चाहिए।

    मुफ़्ती मुकर्रम ने म्यांमार मामले में संयुक्त राष्ट्रसंघ को दखल करने की बात कही

    दिल्ली के फतेहपुर मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ़्ती मुकर्रम ने कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानो पर म्यांमार सरकार का अत्याचार जारी है, और पूरी दुनिया खामोश है। म्यांमार खुलेआम मानवाधिकारों का उलंघन कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र संघ चुपचाप है। इस मामले में यूएन को दखल देना चाहिए। ताकि वह शांति स्थापित हो सके। भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानो को मामला सुलझ जाने के बाद म्यांमार भेजा जाए, उससे पहले वापिस भेजना इंसानियत के खिलाफ होगा।

    कल्बे रुश्दे : म्यांमार सरकार ज़ालिम हो चुकी है

    शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे रुश्दे ने कहा कि में हमेशा मज़लूम के साथ और ज़ालिम के विरोध में होता हूँ। किसी भी चुनी हुई सरकार या विरासत में मिली हुकूमत दो ही हालतों में चलती है। न ईमान से हैट के हो और न ही इंसानियत से घट के हो। रोहिंग्या मुस्लिमों कि ये तस्वीर देख के पता चला कि म्यांमार सरकार ज़ालिम हो चुकी है। सऊदी अरब की चुपी समझ से परे है, क्योकि जिनके हाथो में वे तेल देते है, वो हाथ उनके भाइयो के खून से सने हुए है।

     

    कमाल फ़ारूक़ी ने आंग सान सु से नोबल वापिस लेने की बात की

    मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फ़ारूक़ी ने कहा कि म्यांमार बहुत पहले से रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार कर रहा है। यूएन से लेकर दुनिया भर के लोग खामोश है। उन्होंने नोबेल पुरूस्कार विजेता आंग सान सु को निशाना बनाते हुए कहा कि उनसे ये पुरूस्कार वापिस ले लेना चाहिए क्योंकि आज वो शांति के खिलाफ खड़ी है। भारत में आज इन पीड़ितों को धर्म की नज़रों से देखा जा रहा है। भारतीय केंद्रीय गृह राजयमंत्री का बयान शर्मनाक है। हिन्दुस्तान की तहज़ीब रही है कि हिन्दुस्तान बहार से आये शरणार्तियों कि मदद करता है, चाहे वह श्रीलंका से आये तमिल हो या फिर अफगानिस्तान से आये अफगानी। सबको शरण दिया है। बंगलादेश से आये हिन्दुओ को नागरिकता देने की बात करते है लेकिन मज़लूम रोहिंग्याई मुसलमानो को वापस भेजने की बात करते है।

     

    रोहिंग्या मुसलमानो को वापिस भेजना इंसानियत और अंतर्राष्ट्रीय लॉ के खिलाफ है: सलीम इंजीनियर

    जमात-ए-इस्लामी हिन्द के महासचिव ने कहा कि हमने उम्मीद की थी कि पीएम मोदी अपने म्यांमार दौरे पर रोहिंग्या मुसलमान के मुद्दे पर खुलकर बोलेंगे, लेकिन उन्होंने मायूस किया है। भारत का बर्मा के साथ अच्छा संबंध रहा है, ऐसे में भारत बर्मा से इस मुद्दे को सुलझा सकता है। रोहिंग्या मुस्लिम काफी संख्या में भारत में रह रहे है, कुछ साम्प्रदायिक लोग उन्हें वापिस भेजने की बात कर रहे है। जो अंतर्राष्ट्रीय लॉ और इंसानियत के खिलाफ है।