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    मोदी सरकार

    रविवार, 9 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। यह पिछले 3 वर्षों के कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार का तीसरा मन्त्रिमण्डल विस्तार है। मन्त्रिमण्डल के 4 मौजूदा मंत्रियों निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल और मुख़्तार अब्बास नकवी को पदोन्नति देकर कैबिनेट में शामिल किया गया है। वहीं सुरेश प्रभु, उमा भारती और विजय गोयल को पदावनत किया गया है। मन्त्रिमण्डल की फेरबदल में कुल 32 मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले गए हैं। इस मन्त्रिमण्डल विस्तार में एनडीए के किसी भी सहयोगी दल को शामिल नहीं किया गया है। इस मन्त्रिमण्डल विस्तार में 9 नए चेहरों को जगह दी गई है। सभी नए चेहरे भाजपा के ही हैं।

    उत्तर प्रदेश-बिहार पर नजर

    भाजपा के राष्ट्रीय अमित शाह अध्यक्ष इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि 350+ के लक्ष्य तक पहुँचने का रास्ता देश की राजनीति की धुरी उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा(+) ने सूबे की 73 सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाया था और यह भाजपा के बहुमत हासिल करने का बड़ा कारण भी रहा था। भाजपा इस बार भी प्रदेश के वोटरों को साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने सवर्णों को साधा और केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाकर पिछड़ों को साध लिया। रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा ने दलितों का भरोसा जीता और रुष्ट से चल रहे ब्राह्मणों को मनाने के लिए डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेशाध्यक्ष बना दिया।

    मन्त्रिमण्डल विस्तार में भी जातीय गणित देखने को मिला जब भाजपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े ब्राह्मण चेहरे शिव प्रताप शुक्ल को मन्त्रिमण्डल में जगह दी। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पहली बार सांसद बने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह को मंत्री बनाया गया। बिहार से भी भाजपा ने अश्विनी चौबे और आरके सिंह को मन्त्रिमण्डल में शामिल कर राज्य के वोटरों को मजबूत सन्देश दिया। बिहार से आने वाले गिरिराज सिंह को प्रमोट किया गया वहीं राधामोहन सिंह का कृषि मंत्रालय बरकरार रखा गया। उत्तर प्रदेश और बिहार को मिलाकर कुल 120 लोकसभा सीटें हैं और 2019 में भाजपा यहाँ सहयोगियों संग क्लीन स्वीप करना चाहती है। यह अमित शाह के “मिशन-2019” को और मजबूती देगा और भाजपा के लिए 350+ तक पहुँचना आसान होगा।

    साउथ कार्ड है निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाना

    आखिरकार देश को एक पूर्णकालिक रक्षा मंत्री मिल ही गया। अभी तक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का कार्यभार देख रही निर्मला सीतारमण को देश का नया रक्षा मंत्री बनाया गया है। वह पहली महिला है जो पूर्णकालिक तौर पर इस पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनसे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे थे। निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री हैं। उनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने 1975 और 1980-82 तक रक्षा मंत्रालय अपने पास रखा था। निर्मला सीतारमण तमिलनाडु से हैं और उनकी शादी आंध्र प्रदेश में हुई है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व उन्हें रक्षा मंत्री का अहम पद देकर दक्षिण भारत में अपने आधार को मजबूत करना चाहती है। भाजपा ने इस साउथ कार्ड की शुरुआत वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति बनाकर की थी।

    तटीय राज्यों पर नजर

    भाजपा की नजर तटीय राज्यों की 123 लोकसभा सीटों पर भी हैं। अमित शाह इन 123 सीटों में से 100 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरे हैं। इन तटीय सीटों में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु ,पॉण्डिचेरी और केरल की सीटें शामिल हैं। इसी मद्देनजर भाजपा आलाकमान ने उड़ीसा से आने वाले धर्मेंद्र प्रधान को बड़ी जिम्मेदारी दी है। केरल से आने वाले अल्फ़ोंस कन्नथनम को पर्यटन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला है। निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाना तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के वोटरों को लुभाने वाला कदम है।

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।